★ एक ज़रूरी झूठ ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता "एक ज़रूरी झूठ" उन एहसासों के बारे में है, जिन्हें हम कभी-कभी अपनों को खोने के डर से छिपा लेते हैं। ज़िंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ सच बोलना मुश्किल हो जाता है, और एक छोटा सा 'झूठ' हमारे सबसे प्यारे रिश्तों को बचाने का एकमात्र सहारा बन जाता है।
इस कविता में मैंने उस कशमकश को शब्दों में पिरोने की कोशिश की है, जहाँ दिल में मोहब्बत का समंदर तो है, पर उसे बयां करने से डर लगता है। यह कविता उन लोगों के लिए है, जिन्होंने शायद किसी रिश्ते को बचाने के लिए अपनी भावनाओं को खामोश रखा है।
अगर आप भी कभी ऐसी स्थिति से गुज़रे हैं, जहाँ प्यार को ज़िंदा रखने के लिए खामोशी या झूठ बोलना पड़ा हो, तो यह कविता सीधे आपके दिल को छुएगी। इसे पूरा ज़रूर पढ़ें और अपने विचार साझा करें...!
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बहुत कर लिया खुद से समझौता,
अब और नहीं होती ये झूठी बातें,
पर सच तो ये है कि साफ़ है नियत मेरी,
और नेक हैं मेरे इरादे,
मैं तो बस तेरी पलकों की छाँव में,
अपनी खुशियों का बसेरा चाहती हूँ,
भले ही अपनी रातों के हिस्से में,
मैं उम्र भर का अंधेरा चाहती हूँ...!
पर ये दिल की बेकरारी है कि,
अब पल भर को थमने का नाम नहीं लेती,
तेरी ये खामोश सी यादें मुझे,
एक लम्हा भी आराम नहीं देतीं,
नहीं चाहती मैं झूठ की बुनियाद पर,
कभी भी तेरा दिल दुखाना,
पर डरती हूँ कि हमारी इस दास्ताँ को,
गलत न समझ ले ये ज़माना...!
मैं मौन थी अब तक,
क्योंकि ये झूठ ही तो हमारा सहारा था,
इस 'दोस्ती' के पावन रिश्ते ने ही,
मेरी डूबती कश्ती को किनारे उतारा था,
जानती हूँ जिस दिन ये हकीकत,
तेरी नज़रों के सामने आएगी,
तू शायद सब कुछ भुलाकर,
मुझे तन्हा छोड़कर चली जाएगी...!
आज जो तू मेरे इतने करीब है,
पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर,
एक मासूम सा दोस्त बनकर,
मेरे हर ज़ख्म को मिटाकर,
मैं नहीं चाहती वो मान, वो भरोसा,
एक पल में नफरत में बदल जाए,
कि मेरी रूह की सच्चाई सुनकर,
तेरा इंसानियत से भरोसा ही उठ जाए...!
पर सच कहूँ तो ये झूठ बोलना,
आज मेरी सबसे बड़ी मजबूरी है,
तुझे अपनी ज़िंदगी में रखने के लिए,
दिलों के बीच ये फासला भी ज़रूरी है,
कैसे कह दूँ कि शुरुआत से अब तक,
सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरा इंतज़ार है,
कैसे कह दूँ कि एक दोस्त की सूरत में,
मुझे आज भी तुझसे बेइंतेहा प्यार है...!
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
'एक जरूरी झूठ' कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-
● क्या किसी को खोने के डर से अपने प्यार को 'सिर्फ दोस्ती' का नाम देना सही है ?
● क्या एक उम्र भर के झूठ से बेहतर वो सच है जो रिश्ता खत्म कर सकता है ?
● हम अक्सर सच बोलने से क्यों डरते हैं ? ज़माने की सोच से या अपने खास इंसान को खोने से ?
● क्या एक तरफा इंतज़ार और खामोश मोहब्बत कभी मुकम्मल हो पाती है ?
● अगर आपको पता चले कि आपका कोई दोस्त आपसे प्यार करता है, तो आपका नज़रिया बदलेगा या रिश्ता ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-
इस कविता का सार यही है कि कभी-कभी किसी रिश्ते को बचाने के लिए बोला गया छोटा सा 'झूठ' भी एक ज़रूरी सच्चाई बन जाता है। प्यार में अक्सर ऐसी स्थितियाँ आती हैं जहाँ हम अपने जज़्बातों को इसलिए छुपा लेते हैं क्योंकि हमें उस इंसान को खोने का डर होता है। यह कविता हमें यह अहसास दिलाती है कि खामोशी और झूठ का यह बोझ उठाना भले ही तकलीफदेह हो, लेकिन यह उस रिश्ते की पवित्रता और गहराई को बनाए रखने की एक कोशिश भी है।
अंत में, यह कविता हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हर सच का सामने आना ही ज़रूरी है? कई बार कुछ बातों को दिल की गहराइयों में ही रखना उस इंसान के प्रति हमारे प्रेम और सम्मान को दर्शाता है। उम्मीद है कि 'एक ज़रूरी झूठ' ने उन सभी लोगों के दिल को छुआ होगा जो अपने प्यार को बिना नाम दिए, केवल निभाने की कोशिश कर रहे हैं। याद रखें, कभी-कभी अनकही बातें और छोटे झूठ भी प्यार को ज़िंदा रखने का एक ज़रूरी जरिया होते हैं।


1 Comments
Frndship ❤️
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
अपने विचार लिखिए 🤔
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अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌