★ एक ज़रूरी झूठ ★
बहुत कर लिया खुद से समझौता,
अब और नहीं होती ये झूठी बातें,
पर सच तो ये है कि साफ़ है नियत मेरी,
और नेक हैं मेरे इरादे,
मैं तो बस तेरी पलकों की छाँव में,
अपनी खुशियों का बसेरा चाहती हूँ,
भले ही अपनी रातों के हिस्से में,
मैं उम्र भर का अंधेरा चाहती हूँ...!
पर ये दिल की बेकरारी है कि,
अब पल भर को थमने का नाम नहीं लेती,
तेरी ये खामोश सी यादें मुझे,
एक लम्हा भी आराम नहीं देतीं,
नहीं चाहती मैं झूठ की बुनियाद पर,
कभी भी तेरा दिल दुखाना,
पर डरती हूँ कि हमारी इस दास्ताँ को,
गलत न समझ ले ये ज़माना...!
मैं मौन थी अब तक,
क्योंकि ये झूठ ही तो हमारा सहारा था,
इस 'दोस्ती' के पावन रिश्ते ने ही,
मेरी डूबती कश्ती को किनारे उतारा था,
जानती हूँ जिस दिन ये हकीकत,
तेरी नज़रों के सामने आएगी,
तू शायद सब कुछ भुलाकर,
मुझे तन्हा छोड़कर चली जाएगी...!
आज जो तू मेरे इतने करीब है,
पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर,
एक मासूम सा दोस्त बनकर,
मेरे हर ज़ख्म को मिटाकर,
मैं नहीं चाहती वो मान, वो भरोसा,
एक पल में नफरत में बदल जाए,
कि मेरी रूह की सच्चाई सुनकर,
तेरा इंसानियत से भरोसा ही उठ जाए...!
पर सच कहूँ तो ये झूठ बोलना,
आज मेरी सबसे बड़ी मजबूरी है,
तुझे अपनी ज़िंदगी में रखने के लिए,
दिलों के बीच ये फासला भी ज़रूरी है,
कैसे कह दूँ कि शुरुआत से अब तक,
सिर्फ़ और सिर्फ़ तेरा इंतज़ार है,
कैसे कह दूँ कि एक दोस्त की सूरत में,
मुझे आज भी तुझसे बेइंतेहा प्यार है...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
● क्या किसी को खोने के डर से अपने प्यार को 'सिर्फ दोस्ती' का नाम देना सही है ?
● क्या एक उम्र भर के झूठ से बेहतर वो सच है जो रिश्ता खत्म कर सकता है ?
● हम अक्सर सच बोलने से क्यों डरते हैं ? ज़माने की सोच से या अपने खास इंसान को खोने से ?
● क्या एक तरफा इंतज़ार और खामोश मोहब्बत कभी मुकम्मल हो पाती है ?
● अगर आपको पता चले कि आपका कोई दोस्त आपसे प्यार करता है, तो आपका नज़रिया बदलेगा या रिश्ता ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।







1 Comments
Frndship ❤️
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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