__________________________ मेरा आईना खो गया

मेरा आईना खो गया


★ मेरा आईना खो गया ★

मैं अपनी हर दुख उसे बताने वाली,

उससे दूर होने का ग़म किसे बताऊँ...!

जो मेरी चुप्पी में भी,

सब पढ़ लेता था,

अब ये छलकती आँखें,

किसे दिखाऊँ...!

वो पास था तो,

कोई डर न था दुनिया का,

उसी के हाथ में तो हाथ था मेरा,

वही एक था जो मुझे,

मुझ से ज्यादा जानता था,

अब खो गया है जो,

वो साथ किसे दिखाऊँ...!

मेरी छोटी सी चोट पर भी,

जो तड़प उठता था,

मेरी एक हँसी के लिए जो,

दुनिया से लड़ता था,

आज रूह ज़ख्मी है,

और वो पास नहीं है,

मैं अपना ये दर्द-ए-आलम,

किसे सुनाऊँ...!

बातों ही बातों में जो,

हर बोझ हल्का करता था,

मेरे लिए वो शख्स,

खुद से भी ज्यादा लड़ता था,

अब सन्नाटा है कमरे में,

और यादें हैं उसकी,

मैं ये तन्हाई की रातें अब,

किसके गले लग के बिताऊँ...!

वही मेरा सब कुछ था,

वही मेरी दुनिया थी,

उसके होने से ही,

मेरे जीने की हर वजह थी,

अब इस टूटे हुए,

दिल का हाल किसे सुनाऊँ,

मैं अपनी हर दुख उसे बताने वाली,

उससे दूर होने का गम किसे बताऊ...!


🌸 शुक्रिया 🌸 


आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕


● क्या आपने कभी किसी ऐसे शख्स को खोया है जो आपकी खामोशी भी पढ़ लेता था ?


● इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल को छू गई ?


● सच्चे साथी के जाने के बाद अकेलेपन से कैसे लड़ें ? अपनी राय दें।


● क्या आपके पास भी कोई ऐसा 'आइना' है जिससे आप सब कुछ शेयर करते हैं ?


● दुख के समय में आपकी सबसे बड़ी ताकत क्या होती है ?


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