★ नारी: सृष्टि का आधार ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'नारी: सृष्टि का आधार' उस असीम शक्ति और ममता को समर्पित है, जो इस पूरे संसार का आधार है। अक्सर हम नारी को केवल कोमल देह या रिश्तों के सांचे में देखते हैं, लेकिन यह कविता उस आदि शक्ति को सलाम करती है जो हर बाधा को चीरकर अपने सपनों को आसमान में पंख देती है। नारी के बिना न तो जीवन की शोभा है और न ही रिश्तों की गर्माहट। यह कविता नारी के उस अटूट साहस और धैर्य का उत्सव है, जिसके बिना यह पूरी दुनिया महज एक श्मशान के समान है। आइए, इस कविता के माध्यम से नारी के उन अनगिनत रूपों को नमन करें जो हमारे जीवन को सवांरते हैं...!
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तुम मात्र कोमल देह नहीं,
तुम आदि शक्ति का मान हो,
इस नीरस सूनी धड़कन में,
तुम ही तो जीवन-प्राण हो,
तुम केवल घर की शोभा नहीं,
तुम जग का आधार बनी हो,
तुम काल की गति को मोड़ने वाली,
एक सुंदर अवतार बनी हो...!
कभी माँ बनकर आँचल से,
तुमने ममता को सींचा है,
कभी बहन बन रक्षा-सूत्र से,
भाई का भाग्य निखारा है...!
कभी पत्नी बन हर बाधा में,
तुमने साथ निभाया है,
हर रिश्ते की तपती धूप में,
तुम शीतल साया बन आई हो...!
तुमने बाधाओं को चीरा है,
नभ में अपने पर फैलाए हैं,
कल तक जो बंद दरवाजे थे,
वहाँ आज तुम्हारे साये हैं,
तुम गिरकर फिर संभलना जानती हो,
तुम तपकर सोना भी बनती हो,
जो हार न माने कभी पथ पर,
तुम वो अटूट नियति हो...!
क्यों बाँधें तुम्हें एक दिन में,
हर दिन ही तुम्हारा सम्मान रहे,
तेरे चरणों की धूल जहाँ हो,
वह आँगन स्वर्ग समान रहे,
नारी तुम केवल नाम नहीं,
तुम सृजन का पूरा संसार हो,
इस सृष्टि की हर एक धड़कन का,
तुम ही तो असली सार हो...!
इसी से महकता घर-आँगन,
इसी से जग की शान है,
जहाँ मिले स्नेह और आदर इसे,
वहाँ देवों का वास होता है,
नारी के बिना तो ये संसार,
बस मिट्टी का एक श्मशान है...!
~~~🙏~~~
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
● नारी शक्ति को आप एक शब्द में कैसे परिभाषित करेंगे ?
● आपके जीवन की सबसे प्रेरणादायक महिला कौन हैं ?
● क्या आपको लगता है कि समाज में नारी का सम्मान बढ़ा है ?
● नारी के बिना क्या यह संसार संभव है ?
● एक ऐसी बात जो आप हर महिला से कहना चाहेंगे ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
निष्कर्ष (Conclusion):-
'नारी: सृष्टि का आधार' यह संदेश देती है कि नारी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि इस सृष्टि का संपूर्ण आधार और प्राण है। चाहे वह मां का आंचल हो, बहन का रक्षा-सूत्र हो या पत्नी का साथ—नारी हर रूप में जीवन को एक नई दिशा और सुकून देती है। कविता का सार यही है कि जहाँ नारी का सम्मान और स्नेह होता है, वहीं स्वर्ग का वास होता है। अंत में, यह कविता हमें याद दिलाती है कि नारी के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है, क्योंकि वही इस दुनिया की हर धड़कन की असली सार है।
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2 Comments
नारी सृष्टि का आधार है जो की सत्य है नारी के बिना संसार नहीं
ReplyDeleteRespect all women 🙏
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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