★ एकतरफा दोस्ती ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'एकतरफा दोस्ती' उस दर्द को बयां करती है, जिसे हम अक्सर अपनों के सामने जाहिर नहीं कर पाते। दोस्ती का रिश्ता विश्वास की नींव पर टिका होता है, लेकिन क्या हो जब हमें यह अहसास हो कि जिस रिश्ते को हम अपनी दुनिया मानते थे, वह सामने वाले के लिए बस एक दिखावा था? यह कविता उस कश्मकश का आइना है, जहाँ हम निस्वार्थ भाव से किसी का साथ निभाते हैं, लेकिन बदले में हमें सिर्फ तन्हाई और सवालों का एक अंतहीन सिलसिला मिलता है। उम्मीद है, यह कविता उन खामोश जज्बातों को एक आवाज़ देगी, जो अक्सर टूटे हुए भरोसे के शोर में दब जाते हैं...!

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खुशी से जिया करती थी,

 खुद में मस्त रहा करती थी,

मेरी खुशी मेरे दोस्तों को माना करती थी,

हर दुःख उस संग बांटा करती थी,

हर बात पर झगड़ा किया करती थी,

दुनियां भुला बैठी थी,

उसे हां उसे मैं अपनी दोस्त मान बैठी थी,

जिसकी मैं कभी दोस्त नहीं थी,

बेफिजुल आस लगा बैठी थी,

खुद को उसकी दोस्त समझ बैठी थी...!

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(कैसे मान लूं, कैसे मान लूं)

उसका प्यार दिखावा था,

वो मेरी खुशी का एक मात्र सहारा था,

कैसे भुल जाऊ वो पल,

जिस पल में वो मेरी साथ रहा करती थी,

मुझे रोती देख खुद रोया करती थी,

मेरे लिए मुझसे ही लड़ जाया करती थी,

मेरी गलती मुझे बताती और हर बार समझाया करती थी,

खुद उदास होकर मुझे हंसाती थीं,

झगड़ती थी मनाती थी जिन्दगी में नई रंग भर जाती थी,

मेरे लिए नामुमकिन चीज कर जाती थी...!

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(और अब कहती है वो सब दिखावा था)

       कैसे मानु कैसे मानु ये बात,

वो मेरी दोस्त हैं पर मैं उसकी दोस्त नहीं,

उसे मेरी खुशी चाहिए जमाने का ताना नहीं,

शायद इसलिए आज वो मेरी दोस्त तो रही,

लेकिन मैं उसकी दोस्त नहीं,

दिल कहता है सब सच था कोई दिखावा नहीं,

उम्मीदें खत्म अब कोई सहारा नहीं,

सब कुछ है मेरे पास मम्मी पापा भाई बहन,

पर जिन्दगी को देखने का वो नजरिया नही....।

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👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● क्या आपको भी लगता है कि दोस्ती कभी एकतरफा हो सकती है ?

● क्या किसी का साथ 'दिखावा' हो सकता है, भले ही उसने आपके लिए बहुत कुछ किया हो ?

● क्या आपने कभी अपनी सबसे अच्छी दोस्ती को टूटते हुए देखा है ?

● दिल की बात सुनें या दिमाग की ? जब दोस्त कहे कि सब दिखावा था।

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

निष्कर्ष (Conclusion):-

इस कविता के माध्यम से मैंने उस सच्चाई को स्वीकार करने की कोशिश की है, जो बहुत कड़वी और तकलीफदेह होती है। 'एकतरफा दोस्ती' का दर्द केवल यह नहीं है कि हमें धोखा मिला, बल्कि यह है कि हमने खुद को उस रिश्ते में कितना खो दिया था। अंततः, यह कविता हमें सिखाती है कि चाहे कोई रिश्ता कितना ही गहरा क्यों न लगे, कभी-कभी खुद की खुशी और आत्म-सम्मान के लिए उन जंजीरों से बाहर निकलना जरूरी होता है। उम्मीद है, यह कविता आपको उन रिश्तों को पहचानने का साहस देगी जो वाकई आपकी परवाह करते हैं, और आपको उस एकतरफा सफर के दर्द से उबरने की नई रोशनी दिखाएगी।

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