★ गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य ★
शिक्षक का संकल्प...!
मैं केवल अक्षर नहीं,
तुम्हें जीवन जीना सिखाऊँगा,
तुम्हारी आँखों की नमी को,
मैं मुस्कान बनाऊँगा,
तू गिरना, तू थकना,
मगर कभी हार मत मान लेना,
मैं वो हाथ हूँ,
जो हर मुश्किल में तुझे थाम जाऊँगा...!
छात्र की पुकार...!
कभी किताबों का बोझ है,
कभी उम्मीदों का डेरा,
घनी है रात नाकामियों की,
कब होगा सवेरा?
गुरुवर! जब डगमगाते हैं कदम,
इस दुनिया के शोर में,
आपका एक शब्द भर देता है,
मुझमें नया सवेरा...!
साझा संगम...!
एक कच्ची मिट्टी की मूरत है,
एक कुम्हार की कला,
दोनों के मिलने से ही तो,
ज्ञान का पावन दीप जला,
कोई अंक तय नहीं करेंगे,
हमारे कल की ये कहानी,
शिक्षक की मेहनत सफल होगी,
जब छात्र लिखेगा नई कहानी...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
● इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल को छू गई ?
● आपके जीवन में आपके शिक्षक का क्या योगदान रहा है ?
● अपने उस पसंदीदा शिक्षक का नाम लिखें जिन्होंने आपको गिरकर संभलना सिखाया।
● क्या आप भी मानते हैं कि अंक (Marks) नहीं, बल्कि सीख जीवन की कहानी लिखती है ?
● एक छात्र के रूप में आपको सबसे बड़ी चुनौती क्या लगती है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।





2 Comments
Exam badi chunoti hai mere liye to😔
ReplyDeleteLove this poetry
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
अपने विचार लिखिए 🤔
अपने अहसास शेयर कीजिए 🤝🤗
अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌