★ सहेली से पराई होने तक का सफर ★
सगाई का दिन था,
तू बहुत खुश थी,
आंखे नम थी मेरी,
पर तुझे दिखा ना सकीं,
तुझे खोने के डर से,
मैं कितनी डरी थी,
सच कहूँ तुझसे,
तुझे देखूंगी तो रो दूँगी,
बस यही सोच के नहीं आई,
तेरी दोस्त होकर भी,
मैं तेरी खुशी देख ना पाई...!
लगा जैसे अब तु मुझसे,
बहुत दूर हो जाएगी,
बचपन का वो,
प्यारा सा साथ छुट जाएगी,
वो फेरे वो कसमें,
वो तेरा पराया होना,
मेरे लिए आसान नहीं था,
मुझे तोड़ रहीं थीं ये दुनिया की रस्में...!
आज भी ये फोटो,
जब जब मैं देखती हूँ,
उन बीते हुए लम्हों की,
यादों मे खो जाती हूँ,
आंखे भर आती है,
पर दिल अब मुस्कराता है,
हमारा रिश्ता आज भी,
सबसे गहर कहलाता है,
भले ही तू आज,
किसी और के घर की शान है,
पर याद रखना पगली,
तू ही मेरी जान है...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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1 Comments
बहुत सुंदर कविता शादी के बाद दूरिया आती है पर दोस्ती वही रहती है
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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