★ खामोश रातें ★
वो रातें खामोश सी थीं,
मोहब्बत की पनाहों में थीं,
घबराहट के बादल छाए थे,
और दिल के दरवाज़े पर,
इश्क की पहली दस्तक हो रही थी...!
उनके आँखों का वो गहरा चमक,
इश्क बयां कर रहा था,
चेहरे पर छाया था उत्सुकता,
हाथों में एक-दूजे का हाथ था,
धड़कनें बेतहाशा शोर मचा रहा था...!
मैं अपनी खामोशी की चादर ओढ़कर,
बेचैन धड़कन को चुप करा रही थी,
और वो इश्क में डूबा जा रहा था,
उसका वो मासूम सा चेहरा,
मेरे बरसों के सब्र को तोड़े जा रहा था...!
कैसी जादुई रात थी वो,
जो दो रूहों को इश्क सिखा रही थी,
सारे गम भूल, ज़माने से दूर,
मैं बस उसकी होने लगी थी...!
इश्क खूबसूरत है तब समझ आई,
जब उसकी बाहों में सुकून मिलने लगी,
हर लम्हा अब एक इबादत सा है,
जब से वो मेरे सबसे करीब है...!
थोड़ा पागल सा है,
थोड़ा दीवानों सा है,
मगर उसकी इसी दीवानियत पे,
मैं खुद को पूरी तरह खोती चली गई,
आहिस्ता-आहिस्ता उसकी होती चली गई...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
● आपके लिए प्यार क्या है खामोश रातों का सुकून या दिल का शोर ?
● क्या आप मानते हैं कि आँखें जुबां से ज़्यादा इश्क बयां करती हैं ?
● पार्टनर का 'पागलपन' अच्छा लगता है या उसकी 'सादगी' ?
● क्या किसी की खातिर खुद को खो देना ही असली मोहब्बत है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।








3 Comments
♥️
ReplyDeleteFull of feelings 😍lovely
ReplyDelete🥰
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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