__________________________ स्कूल की वो तीन दोस्त

स्कूल की वो तीन दोस्त

★ स्कूल की वो तीन दोस्त ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'स्कूल की वो तीन दोस्त' उस दौर को समर्पित है, जिसे हम अपनी यादों का सबसे खूबसूरत अध्याय कहते हैं। बचपन के वे बेफिक्र दिन, जब तीन सहेलियों की दुनिया बस उन्हीं के बीच सिमटी होती थी—वो छुट्टी का इंतज़ार, बिना बात की हंसी और एक-दूसरे के छोटे से रूठने-मनाने का वो प्यारा सिलसिला। यह कविता सिर्फ पुरानी यादों का एक पन्ना नहीं है, बल्कि उन जज्बातों का सफरनामा है जो हमें यह एहसास दिलाते हैं कि कैसे मासूमियत भरी दोस्ती धीरे-धीरे समय की जिम्मेदारियों में बदल गई। इस रचना के जरिए हमने कोशिश की है कि उन लम्हों को फिर से जी सकें, जहाँ दुनिया की परवाह किए बिना हम सिर्फ अपने सपनों और साथ को बुनते थे। उम्मीद है कि यह कविता उन सभी को अपनी सहेलियों की याद दिलाएगी, जिनसे अब भले ही मुलाकातें कम हो गई हों, पर दिल के तार आज भी वहीं जुड़े हैं...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

वो स्कूल की छुट्टी का हम तीनों को इंतज़ार,

और फिर साथ में वो घर जाना,

छोटी-सी बात पर रूठना कभी,

फिर एक 'सॉरी' से मान जाना...!

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वो घंटों फोन पर तीनों बिना वजहे बाते करना, 

कहीं भी जाना बस साथ जाना, 

वो चाट- गुपचुप के चटखारे,

कभी बरसातों में छतरी के नीचे,

बुनते थे हम सपने हज़ारों...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

स्कूल की हम तीनों पुरानी सहेली,

पता नहीं अब कहाँ खो गई,

एक ने मांग में सिंदूर भर लिया,

दूसरी घर के कामों में उलझ गई...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

एक बहू बन के सब सह गई,

दूसरी पत्नी बन के संभल जाएगी,

एक माँ बनी तो अपनी पूरी दुनिया,

बस बच्चों के नाम कर गई...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

जो कल टिफिन साथ खाती थी,

आज दुख भी मुझ से कह नहीं पाती,

जो हर बात पे हँसती रहती थी,

आज हँसने की वजह खोजती रह जाती है...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

एक बार जो बिछड़े हम तीनों,

फिर वैसा साथ नहीं मिल पाया,

न वो क्लास रही, न वो बातें,

बस यादों का साया रह गया...! 

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

कभी फोन की कॉल लिस्ट में,

नाम तुम दोनों का सबसे ऊपर था,

पुरानी फोटो वाली गैलरी में,

बस मुस्कुराते थे हम तीनों...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

अब देखूँ उन पुरानी फोटो को,

तो आँखें थोड़ी भर आती हैं,

सच तो ये है कि हम आगे बढ़ गए,

पर दोस्ती हमारी वहीं रुक जाती है...!

𝀈𝀈𝀈👭𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया 👈 

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● स्कूल की वो कौन सी एक बात है जो आपको आज भी सबसे ज्यादा याद आती है ?

● आप अपने ग्रुप में किसके टिफिन का सबसे ज्यादा इंतज़ार करते थे ?

● क्या आपका भी कोई ऐसा दोस्त है जिससे लड़ाई तो बहुत हुई, पर एक 'सॉरी' ने सब ठीक कर दिया ?

● स्कूल की मस्ती और आज की 'बिजी लाइफ' में आपको सबसे बड़ा बदलाव क्या लगता है ?

● जब आप अपनी पुरानी स्कूल वाली फोटो देखते हैं, तो आपके मन में पहला ख्याल क्या आता है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

निष्कर्ष (Conclusion):-

अंत में, यह कविता हमें याद दिलाती है कि समय का पहिया चाहे कितनी ही तेजी से आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन सच्चे दोस्तों की यादें कभी नहीं मिटतीं। आज हम अपनी-अपनी गृहस्थी और व्यस्तताओं में भले ही उलझ गए हों, पर वे पुरानी फोटो और फोन की गैलरी में कैद लम्हे यह बयां करते हैं कि हम बदल जरूर गए हैं, लेकिन हमारी दोस्ती का वह खूबसूरत एहसास आज भी वहीं रुका हुआ है। भले ही हम आज उसी तरह साथ न हों, पर वे तीन सहेलियाँ आज भी एक-दूसरे के दिल के करीब हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि दोस्ती केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि उन यादों को सहेजने का नाम है, जो हमें आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून के कुछ पल दे जाती हैं।

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2 Comments

  1. बहुत गहरी दोस्ती है

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