__________________________ बिछड़कर भी तुम ही तुम हो

बिछड़कर भी तुम ही तुम हो

              

★ बिछड़कर भी तुम ही तुम हो ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'बिछड़कर भी तुम ही तुम हो' उन भावनाओं को बयां करती है जो किसी के जाने के बाद हमारे दिल में एक गहरा निशान छोड़ जाती हैं। अक्सर जब कोई अपना हमसे दूर हो जाता है, तो दुनिया तो वैसी ही रहती है, पर हमारे अंदर एक ऐसा तूफान सा मच जाता है जो हमें हर पल बेकरार करता है। यह कविता उस कशमकश को समर्पित है, जहाँ हम चाहकर भी उस इंसान की यादों से बाहर नहीं निकल पाते और खुद से ही लड़ते रहते हैं। मेरी इस कोशिश का मकसद उन्हीं अनकहे जज्बातों को शब्दों में पिरोना है, जो हम अक्सर भीड़ में भी अकेले महसूस करते हैं। उम्मीद है कि यह कविता आपके दिल के उन अनछुए अहसासों को ज़रूर छुएगी...!


~~~~❤~~~~

कुछ लिखना चाहती हूँ, 

पर लिख नहीं पा रहीं हूँ, 

अन्दर एक ऐसी तूफान है, 

जो मुझे ही निगल रहीं हैं, 

मैं खुद से हार रहीं हूँ, 

इस दर्द से कैसे लडूं...!

~~~~❤~~~~

तुम्हें जाने दूँ,

ऐसी कोई बहाना नहीं है, 

पर तुम्हें भूल जाऊँ, 

ऐसा कोई पल नहीं हैं, 

जानती हूँ मैं बुरी हूँ, 

कमियाँ हैं मुझमें, 

पर माफ़ करना, 

मेरी दुनिया थमी हैं तुझमें...!

~~~~❤~~~~

तुम्हें पागलों की तरह चाहना,

बस यही मेरे बस में था,

और तुम्हारा मुझे छोड़ जाना,

अब किस्मत के हाथों में था,

मैं रोती हूँ, तड़पती हूँ, 

पर तुमसे कुछ नहीं कहती...!

~~~~❤~~~~

तुम्हारी यादें आँसू बनकर, 

मेरी आँखों से बहती हैं,

तुमसे बिछड़कर मैं जिंदा तो हूँ, 

पर मुझमें अब मैं कहा हूँ? 

तुम पास नहीं हो मेरे, 

फिर भी तुम ही तुम हो, 

इस सीधे साधे दिल की, 

बस एक चाहत तुम हो...!

~~~~❤~~~~

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ अनकहे सवाल हैं:-

● इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल को सबसे ज़्यादा छू गई 

● क्या कभी आपने भी किसी से दूर होकर महसूस किया है कि— तुम पास नहीं हो मेरे, फिर भी तुम ही तुम हो ?

● जब दिल में भावनाओं का तूफ़ान हो, तो क्या लिखना ही सबसे बड़ा सुकून है ?

● इस कविता को पढ़कर आपके दिल में सबसे पहला शब्द क्या आया ? (जैसे: दर्द, सच्चा प्यार, या अधूरापन)

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

 लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

अंत में, यह कविता केवल बिछड़ने का दुख नहीं है, बल्कि यह उस प्यार की सच्चाई है जो फासलों के बाद भी रूह में बसा रहता है। जब हम किसी को अपनी दुनिया मान लेते हैं, तो उसका जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, बल्कि हमारी पूरी कायनात का बिखर जाना होता है। भले ही आज वो हमारे पास नहीं हैं, लेकिन हमारी हर सांस और हर ख्याल में उनका ही पहरा है।

इस कविता के माध्यम से मैंने उस तड़प को शब्दों में समेटने की कोशिश की है, जिसे हम अक्सर लोगों की भीड़ में छिपाकर रखते हैं। यह जानकर सुकून मिलता है कि प्यार की गहराई सिर्फ साथ रहने में ही नहीं, बल्कि दूर रहकर भी किसी को पूरी शिद्दत से महसूस करने में है। उम्मीद है कि यह कविता उन सभी लोगों की रूह को छुएगी जिन्होंने कभी न कभी किसी को खोया है, लेकिन उसे अपने दिल में हमेशा के लिए संजो कर रखा है।

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1 Comments

  1. Yade humesa rula jata hai jane wale ye kabhi nahi sochte jo bichad gaya uska kya hoga.❤️‍🩹

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