__________________________ उम्मीद की एक सुलगती लौ

उम्मीद की एक सुलगती लौ

 ★ उम्मीद की एक सुलगती लौ ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'उम्मीद की एक सुलगती लौ' उन सभी युवाओं के नाम है, जो आज अपनी ज़िंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। अक्सर अंकों की दौड़ और दुनिया की उम्मीदों के बोझ तले, हम खुद को हारने के करीब पाते हैं और हमें लगता है कि शायद सब कुछ खत्म हो गया है। यह कविता उन खामोश रातों की तड़प और दिल के उस भारीपन को बयां करती है, जिसे हम अपनों से भी छिपाकर रखते हैं। यह कविता केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक याद दिलाने का जरिया है कि एक 'रिजल्ट' आपके पूरे वजूद की पहचान नहीं हो सकता। उम्मीद है, यह कविता उन लोगों को फिर से खड़े होने का हौसला देगी जो अभी अंधेरे में अपनी मंज़िल ढूंढ रहे हैं...!

_____✍️_____

उम्मीद की एक सुलगती लौ,

आँखों में नमी है,

और दिल में है एक भारीपन,

अंकों की इस दौड़ में,

जैसे हार गया है मन,

वो घर की उम्मीदें,

वो माँ-बाप का चेहरा,

आज उदासी के बादलों का,

मुझ पर है पहरा...!

_____✍️_____

दुनियां की बातें और खुद से ये तकरार,

 लगता है जैसे थक कर,

अब मैं गई हूँ हार,

पर सुन ऐ लड़की!

तू सिर्फ एक 'रिजल्ट' नहीं है,

तेरे वजूद की दास्ताँ,

इतनी भी छोटी नहीं हैं...!

_____✍️_____

माना आज अंधेरा घना है,

राह नहीं दिखती,

पर हौसलों की स्याही से ही,

किस्मत हैं लिखी जाती,

ये वक्त एक पड़ाव है,

मंजिल अभी बाकी है,

तू खुद अपनी ताकत बन,

यही तेरी साखी है...!

_____✍️_____

रो ले जी भर के आज,

पर कल फिर से मुस्कुराना,

अपनी मेहनत से दुनिया को,

अपनी जिद् दिखाना,

परिवार की तू लाडली है,

उनका अभिमान बनेगी,

आज की ये नाकामी ही,

कल तेरी पहचान बनेगी...!

_____👍_____


👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

अगर आप मेरी पुरानी कविता पढ़ना चाहते हैं, तो [यहाँ क्लिक करें]

कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● इस कविता की कौन सी लाइन आपको सबसे ज्यादा मोटिवेट करने वाली लगी ?

● क्या कभी आपको भी लगा है कि आप 'सिर्फ एक रिजल्ट' से कहीं बढ़कर हैं ?

● मुश्किल वक्त में आपकी सबसे बड़ी ताकत कौन बनता है—परिवार या आपकी खुद की जिद्द ?

● क्या आप मानते हैं कि आज की नाकामी ही कल की सफलता की नींव बनती है।

● उस लड़की को आप कमेंट में क्या कहना चाहेंगे जो आज हार मानकर बैठी है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

मेरी बाकी कविताएँ पढ़ने के लिए [यहाँ क्लिक करें]

लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

अंत में, यह कविता हमें याद दिलाती है कि हम अक्सर अपनी कीमत सिर्फ एक परीक्षा या परिणामों के तराजू में तौलने की गलती कर बैठते हैं। लेकिन सच तो यह है कि आपकी असली क्षमता आपकी डिग्री या अंकों से कहीं अधिक बड़ी है। जीवन के इन उतार-चढ़ाव वाले पड़ावों पर, आपका सबसे बड़ा सहारा आपका 'आत्मविश्वास' है। जब दुनिया आपसे उम्मीदें कम करने को कहे, तब खुद को यह विश्वास दिलाना सबसे जरूरी है कि आपकी काबिलियत अभी खत्म नहीं हुई है। हिम्मत न हारें, क्योंकि आपकी मेहनत की आंच से जगी हुई यह उम्मीद की लौ ही एक दिन आपको उस मुकाम पर पहुँचाएगी, जहाँ आपकी सफलता सिर्फ एक 'रिजल्ट' नहीं, बल्कि आपके संघर्ष की एक यादगार कहानी होगी। अपनी इस चमक को कभी बुझने न दें।

Post a Comment

1 Comments

  1. तू सिर्फ एक 'रिजल्ट' नहीं है, beautiful line this poem

    ReplyDelete

शब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
अपने विचार लिखिए 🤔
अपने अहसास शेयर कीजिए 🤝🤗
अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌