__________________________ अजनबी सा रिश्ता हमारा

अजनबी सा रिश्ता हमारा

 

★ अजनबी सा रिश्ता हमारा ★

आज की यह कविता 'अजनबी सा रिश्ता हमारा' उस अनोखे और अनकहे अहसास की दास्तान है, जो किसी अनजान शख्स से पहली बार मिलकर दिल में जाग उठता है। कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा अजनबी आ जाता है, जिससे वैसे तो कोई पुराना वास्ता नहीं होता, पर न जाने क्यों उसकी बातों में, उसकी सादगी में एक अजब सा सुकून मिलने लगता है।

इस कविता के माध्यम से मैंने उसी खूबसूरत खिंचाव को शब्दों का रूप देने की कोशिश की है, जहाँ किसी से मिलने की ख्वाहिश दिल में हर वक्त रहने लगती है और उसकी मीठी बातें सीधे दिल को छू जाती हैं। यह एक ऐसा रिश्ता है जो अजनबी होकर भी गैरों जैसा व्यवहार नहीं रखता, बल्कि अपनों से ज़्यादा सच्चा लगने लगता है। उम्मीद है कि इस मीठे अहसास, सादगी और अजनबीपन के इस प्यारे से रिश्ते को समेटती यह कविता आपके दिल को ज़रूर छुएगी...!

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अजनबी सा रिश्ता है आप से, 

पर पता नहीं क्यों, सुकून सी लगती है, 

मिलती नहीं हूँ किसी से, 

पर आप से मिलने की, 

ख्वाहिश सी रखती हूँ, 

बातें इतनी मीठी हैं आपकी, 

लगता है बस सुनती ही जाऊँ,

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सादगी भाने लगी हैं आपकी मुझे, 

गैरों सा व्यवहार नहीं रखती,

कुछ बात आप में हैं, 

आसानी से मेरे दिल को छू गई,

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खूबसूरत इतनी हो,

ये मैं नहीं आपका दिल बताए, 

तारीफ़ करू तो झूठी लगूंगी,

पर सच कहूँ तो आप सच्ची लगती हो,

अजनबी सा रिश्ता है आप से, 

पर पता नहीं क्यूँ सुकून सी लगती है...!

_______★_______

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

● कविता की कौन सी पंक्ति आपके दिल को सबसे ज्यादा छुई ?

● क्या आपको भी कभी किसी अजनबी से बात करके ऐसा ही सुकून मिला है ?

● आपको इंसान की बाहरी खूबसूरती ज्यादा पसंद है या उसके दिल की सादगी ?

● क्या कोई ऐसा अजनबी है जिससे आप भी मिलने की ख्वाहिश रखते हैं ?

● क्या बातों का लहजा किसी अजनबी को अपना बना सकता है ?

● इस खूबसूरत कविता के लिए आपकी तरफ से एक प्यारा सा शब्द क्या होगा ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

निष्कर्ष (Conclusion):-

अंत में, यह कविता हमें यह अहसास दिलाती है कि कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है जहाँ एक अजनबी, अपनों से भी ज्यादा करीब लगने लगता है। यह रिश्ता खून के बंधन से नहीं, बल्कि रूह के जुड़ाव से बनता है, जहाँ सादगी और बातों का लहजा ही एक-दूसरे को अपना बना लेता है। यह रचना इस बात का प्रमाण है कि हर अजनबी के पीछे कोई न कोई ऐसी गहराई छिपी होती है जो दिल को छू जाती है। भले ही ऐसे रिश्ते का नाम या भविष्य अनिश्चित हो, लेकिन जो सुकून और अपनापन उस थोड़े से समय में मिलता है, वह उम्र भर की याद बन जाता है। कभी-कभी अजनबियों से मिलने वाला यह सुकून ही हमें बताता है कि दुनिया में अभी भी सादगी और सच्चा प्यार कहीं न कहीं ज़िंदा है।

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