__________________________ मैं खुद की प्रेमिका होती

मैं खुद की प्रेमिका होती

★ मैं खुद की प्रेमिका होती ★

अगर मैं खुद की प्रेमिका होती,

तो न कभी अकेले में रोती,

दुनिया भले ही लाख सताए,

मैं खुद का ही हाथ थामती,

दूसरों से वफ़ा मांगने के बजाय,

मैं खुद को ही अपना मानती...!

मेरे दिल में जो तूफ़ान छुपा है,

उसे अपनी मुस्कान से सजाती,

कोई समझे या ना समझे मुझे,

मैं खुद को गले से लगाती...!

बचपन की बातें, बचपन की यादें,

अब दिल को मेरे ना दुखातीं,

मैं खुद से ही करती मोहब्बत,

और खुद की ही पलकें बिछाती...!

जब टूटकर बिखरती मैं कहीं,

तो खुद ही खुद को समेटती,

किसी और के सहारे के बिना,

मैं अपनी ही दुनिया समेटती...!

हाँ आम लड़की नहीं हूँ मैं,

मैं तो बहती हुई एक हवा हूँ,

अगर ज़ख्म मिला है मुझे इस जहाँ से,

तो मैं खुद के लिए ही दवा बनती...!



🌸 शुक्रिया 🌸 


आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕


● इस कविता की कौन सी लाइन आपको सबसे अच्छी लगी ?


● क्या आप भी मानते हैं कि खुद से प्यार करना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है ?


● "मैं खुद के लिए ही दवा होती" इस बात से आप कितने सहमत हैं ? 


● जब आप कभी उदास होते हैं, तो खुद को संभालने के लिए क्या करते हैं ?


● क्या आपने कभी खुद को गले लगाकर कहा है कि "मैं तुम्हारे साथ हूँ" ?


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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1 Comments

  1. Sarsavti tomar4 June 2026 at 08:29

    Khud se pyar karna bahut jaruri hai. Bahut sundar kavita hai.

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