__________________________ मरहम - सिसकियों से सजदा तक ( भाग - 1)

मरहम - सिसकियों से सजदा तक ( भाग - 1)



★ मरहम - सिसकियों से सजदा तक ★

भाग 1: पुकार

इस दर्द के लिए तुमको मरहम बना लूं क्या,

तुम कहो तो थोड़ी सी मुस्कुरा लूं क्या,

मुझें फिर से क़िस्मत आज़मानी है अपनी,

फिर से एक बार तुमसे दिल लगा लूं क्या,

साँस लेती हूं तो दम सा घुटता है,

तुम्हारे दिल में एक खिड़की बना लूं क्या...!

काटती है हर रात मुझे अंधेरों में,

बुझे दिये को फिर से जला लूं क्या,

सूरज की किरणें मेरे चेहरे को छू रही,

किरणों से खुद को चमका लूं क्या,

उलझी हूं खुद में, तुम कहो तो खुद को सुलझा लूं क्या...!

आँखें भी थक गई हैं अब सपनो से,

तुम कहो तो हकीकत बना लूं क्या।

पुरानी किताबों के कुछ पन्ने जैसा,

कहो तो फिर से एक बार जीवन बना लूं क्या।

दर्द है तुमसे दूरी और तन्हाई का,

इस दर्द के लिए तुमको मरहम बना लूं क्या...!



To be continued....


🌸 शुक्रिया 🌸


आपकी अपनी 🌹

Ahasas Dayri 📕


● कविता की कौन सी पंक्ति आपके दिल के सबसे करीब रही ? (जैसे: 'तुम्हारे दिल में एक खिड़की बना लूं क्या')


● क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति या याद है, जो आपके लिए 'मरहम' का काम करती है ?


● कविता में अंधेरे से निकलकर 'सूरज की किरणों' की ओर बढ़ने की बात कही गई है। क्या आप भी मानते हैं कि दर्द के बाद मुस्कुराहट ज़रूरी है ?


● "फिर से एक बार तुमसे दिल लगा लूं क्या"—क्या टूटने के बाद फिर से किसी पर भरोसा करना आसान होता है ? अपनी राय दें।


●"आँखें भी थक गई हैं अब सपनो से..."—क्या आप भी कभी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जहाँ आप सपनों को हकीकत में बदलते देखना चाहते थे ?


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें। 





Post a Comment

1 Comments

शब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
अपने विचार लिखिए 🤔
अपने अहसास शेयर कीजिए 🤝🤗
अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌