★ खामोश इकरार ★
ख़ामोश लबों पर चाहत का इकरार रहने दो,
इन नज़रों को ही अपना गु़नहगार रहने दो,
करीब आओ कि साँसों की तपिश महसूस हो सके,
आज दरमियाँ हमारे, बस यह प्यार रहने दो...!
महकती रहे मेरी रूह तुम्हारी यादों की खुशबू से,
मुझ पर सरे-आम अपना ऐतबार रहने दो,
उलझने दो मेरी उँगलियों को तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में,
वक़्त ठहर जाए, बस यही इंतज़ार रहने दो...!
मुझ पर खुदा की बस यही रहनुमाई रहने दो,
ना मैं कुछ कहूँ, ना तुम कुछ कहो लबों से आज,
धड़कनों को ही दिल का हाल-ए-बयां करने दो...!
आज सिमट जाने दो मुझे तुम्हारी इन बाहों में,
हमारे बीच सिर्फ और सिर्फ बेइंतहा प्यार रहने दो...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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1 Comments
बहुत सुंदर कविता मुझे बहुत अच्छा लगा और भी ऐसी कविता भेजो
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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