🌸 यादों की होली - दोस्ती के रंग 🌸
दोस्तों, आज की हमारी यह कविता 'यादों की होली - दोस्ती के रंग' उन खास पलों के बारे में है, जो हम अपने दोस्तों के साथ होली पर बिताते हैं। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह उन यादों का उत्सव है जो हमारे दिल में हमेशा के लिए बस जाती हैं।
इस कविता में मैंने उन पुरानी बातों को लिखा है—दोस्तों के साथ की गई मस्ती, बिना वजह की हँसी, और वो स्वादिष्ट खाना जो माँ के हाथों से बना हो। यह कविता याद दिलाती है कि त्यौहार की असली खुशी अपनों के साथ में ही होती है।
अगर आप भी अपनी पुरानी होली और दोस्तों के साथ बिताए उन सुनहरे दिनों को याद करते हैं, तो यह कविता आपको बहुत अच्छी लगेगी। इसे पूरा ज़रूर पढ़ें और अपनी यादों को फिर से ताज़ा करें...!
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कितनी प्यारी थी वो होली,
और कितना प्यारा वो साथ था,
सच कहूँ तो मेरी ज़िंदगी का वो सबसे,
हसीन अहसास था,
संध्या का वो चिकन खाना,
जैसे बरसों की भूखी हो,
हंस-हंस के पागल होना उसका,
जैसे भांग के नशे में डूबी हो...!
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वो हंसी उसकी रुकती न थी,
हम सब भी खिलखिलाते थे,
रंगों के उस शोर में,
हम अपनी ही धुन में गाते थे,
आशा तेरे घर की वो आँगन,
जहाँ खुशियों का पहरा था,
तेरी दोस्ती का रंग तो,
गुलाल से भी ज्यादा गहरा था...!
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याद है हमें वो सेल्फी लेना,
वो अजीब-अजीब से पोज बनाना,
कभी मुंह बिगाड़ना, कभी हंसना,
और फिर जोर से खिलखिलाना,
वो तस्वीरें आज भी फोन में नहीं,
सीधे दिल में रहती हैं,
हमारी उस पागलपंती की गवाही,
वो फोटो आज भी देती हैं...!
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आशा तेरी माँ के हाथों का वो खाना,
जैसे कोई जादू हो,
महंगे मसालों से ऊपर,
उनमें ममता की खुशबू हो,
वो पकवान वो मिठास,
और वो घर का अपनापन,
उसी में तो बसता है सुकून,
उसी में है सारा जीवन...!
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वो दीदी के संग शरारतो वाली मस्ती,
को गहरे रंग लगाना ऐसा लगा कभी छूटेगा नहीं,
रास्ते में बच्चों का गुब्बारों से हमें भिगोते जाना,
सब याद है मुझे,वो हसीन लम्हा,
वो खूबसूरत दिन,
अधूरा सा लगता है,
अब तो ये सफ़र तुम दोनों के बिन...!
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जब घर आई मैं लौटकर,
तो रूह मेरी वहीं रह गई थी,
आशा की मुस्कान और संध्या की मस्ती,
आँखों में बह रही थी,
तब समझ आया कि वो रौनक,
रंगों के त्यौहार में न थी,
मेरे चेहरे की वो सच्ची खुशी,
तुम सहेलियों के प्यार में थी...!
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वो गुलाल का रंग तो पानी से छूट गया,
पर तुम्हारी दोस्ती का रंग रूह तक उतर गया,
मिले तो थें हम सिर्फ होली खेलने के बहाने,
पर समेट लाए पूरी ज़िंदगी के सबसे
हसीन खज़ाने...!
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𝀈𝀈𝀈🥳𝀈𝀈𝀈
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
अगर आप मेरी पुरानी कविता पढ़ना चाहते हैं, तो [यहाँ क्लिक करें]।
कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
होली की इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● होली की वो कौन सी बात है जो आप कभी नहीं भूल सकते ? (फोटो, खाना या मस्ती )
● आपके ग्रुप में सबसे ज्यादा 'पागलपंती' कौन करता है ? उसका नाम लिखें! 😂"
● क्या आपको भी किसी दोस्त के घर का खाना अपनी माँ के हाथ जैसा लगता है ?
● अगर आपकी सहेलियां आज आपके साथ नहीं हैं, तो उनके लिए एक प्यारा सा मैसेज लिखें।
● आपके लिए होली का मतलब क्या है—ढेर सारे रंग या सहेलियों का संग ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-
अंत में, यह कविता हमें यह अहसास दिलाती है कि होली का त्योहार केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह उन खूबसूरत यादों का आईना है जो हमने अपनों के साथ साझा की हैं। समय के साथ रंग तो धुंधले पड़ सकते हैं और दूरी भी बढ़ सकती है, लेकिन दोस्तों के साथ बिताए वे अनमोल पल, उनकी हंसी, और वह बेफिक्र मस्ती आज भी हमारे दिल के किसी कोने में उतनी ही ताज़ा है।
यह कविता हमें याद दिलाती है कि जीवन की असली खुशी महंगे उपहारों या बड़े आयोजनों में नहीं, बल्कि अपनों के साथ साझा किए गए उस समय में है, जो उम्र भर की पूंजी बन जाता है। उम्मीद है कि 'यादों की होली' पढ़कर आपको भी अपने उन पुराने दोस्तों और बीते हुए सुनहरे दिनों की याद आई होगी। तो देर किस बात की? आज ही अपने उन खास दोस्तों को एक मैसेज भेजें, पुरानी यादें ताज़ा करें और उन्हें बताएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं। क्योंकि रंग तो वक्त के साथ फीके पड़ जाएंगे, लेकिन दोस्ती का ये रंग हमेशा गहरा बना रहेगा।









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