मर्द भी अच्छा लगता है ★
सिर्फ कड़वा बोलने से,
कोई मर्द नहीं होता,
बिना दया और प्रेम के,
कोई दर्द नहीं होता,
अपनी ताकत को जो,
औरों की ढाल बना देता है,
वो हारते हुए रिश्तों में भी,
जान बसा देता है,
मर्द का बड़प्पन उसकी,
अकड़ में कभी नहीं होता,
वो तो उसकी बातों के,
सुकून और सादगी में होता है,
जब संयम का हाथ पकड़कर,
कोई राहों पर चलता है,
मर्यादा में औरत ही नहीं,
मर्द भी अच्छा लगता है...!
नजरों में नूर और बातों में,
शहद जैसा लहजा हो,
इंसान वही है जिसका चरित्र,
सागर जैसा गहरा हो,
जो नारी के सम्मान को,
अपनी खुद्दारी समझता है,
वही तो है वो चिराग जो,
अंधेरों में भी जलता है,
सच्चाई के उस आइने में,
जब चेहरा उसका दिखता है,
मर्यादा में औरत ही नहीं,
मर्द भी अच्छा लगता है...!
बाहर की ताकत से ज्यादा,
मन की शक्ति बड़ी है,
जो औरतों की इज़्ज़त को,
अपनी इज़्ज़त मानता है,
वही असल में इस दुनिया की,
हकीकत जानता है,
सलीके से जो पेश आए,
वो हर दिल में बसता है,
मर्यादा में औरत ही नहीं,
मर्द भी अच्छा लगता है...!
रिश्तों की कद्र करना,
ही असली मर्दानगी है,
संस्कारों को साथ रखना,
ही सच्ची दीवानगी है,
जो अपनी हदों में रहकर,
सबको सम्मान देता है,
वही अपनी पहचान को,
एक नया आसमान देता है,
सलीका हो अगर जीने का,
तो हर कोई जचता है,
मर्यादा में औरत ही नहीं,
मर्द भी अच्छा लगता है...!






3 Comments
मर्यादा पुरुषों के लिए भी जरूरी है औरत ही क्यूँ मर्यादा में रहें।
ReplyDeleteBeautiful poetry ✨️
ReplyDeleteबिल्कुल सही बात है
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
अपने विचार लिखिए 🤔
अपने अहसास शेयर कीजिए 🤝🤗
अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌