__________________________ खुद के नाम एक शाम

खुद के नाम एक शाम


 ★ खुद के नाम एक शाम ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता "खुद के नाम एक शाम" उन पलों के बारे में है, जो हम अक्सर दूसरों की खुशियों और भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में कहीं खो देते हैं। क्या आपने कभी खुद के लिए वक्त निकाला है? यह कविता बस उसी खूबसूरत ठहराव और खुद से फिर से जुड़ने की एक छोटी सी कोशिश है।

इस कविता में मैंने उन अहसासों को पिरोया है, जहाँ दुनिया के शोर से दूर, हम अपनी धड़कनों को सुन सकते हैं और अपनी छिपी हुई ख्वाहिशों को जान सकते हैं। अगर आप भी कभी भीड़ से दूर अपने साथ थोड़ा वक्त बिताना चाहते हैं, तो यह कविता आपको बहुत सुकून देगी...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ,

उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ,

दुनिया की इस भाग-दौड़ से,

थोड़ा सा अब आराम लिखूँ,

भीड़ से दूर एक एकांत चुनूँ,

अपनी धड़कन का संगीत सुनूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

ना कल की फिक्र, ना बीता कल हो,

बस सुकून का एक प्यारा सा पल हो,

कागज़ पर दिल के अरमान लिखूँ,

एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

धुंधली पड़ गई जो अपनी ही सूरत,

तराशूँ उसे जैसे कोई खूबसूरत मूरत,

खुद से खुद की पहचान लिखूँ,

उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

चाय की चुस्की में यादें घुली हों,

बंद आँखों में कुछ बातें खुली हों,

भीतर का परिंदा और ऊँची उड़ान लिखूँ,

एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ...!

                              𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

बहुत जिए हम औरों की खातिर,

गवाएँ हैं पल ज़माने की खातिर,

अब अपनी हस्ती का ऊँचा मक़ाम लिखूँ,

उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

जो बातें दिल में ही दबी रह गईं,

जो आँखें चुपचाप सब कह गईं,

उन खामोशियों को ज़ुबान लिखूँ,

एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ,

उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● आप खुद के साथ समय बिताने के लिए क्या करना पसंद करते हैं ? (जैसे: चाय पीना, संगीत सुनना या लिखना)।

● क्या आपको भी कभी भीड़ से दूर अकेले रहने का मन करता है ?

● "खुद से खुद की पहचान" — इस बात पर आपके क्या विचार हैं ?

● आपके दिल का वो कौन सा सपना या 'उड़ान' है, जिसे आप अब जीना चाहते हैं ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

"खुद के नाम एक शाम" कविता हमें यह याद दिलाती है कि भागदौड़ भरी इस दुनिया में हम दूसरों की खुशी और जिम्मेदारियों के बोझ में अक्सर खुद को कहीं पीछे छोड़ देते हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि सुकून पाने के लिए हमें किसी बड़ी चीज़ की तलाश करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि अपने साथ कुछ पल बिताने और अपनी खामोशियों को सुनने भर से ही जीवन में नई ऊर्जा आ जाती है।

अंततः, यह कविता खुद को फिर से पहचानने और अपने अधरें सपनों को एक बार फिर से जीने का न्योता है। जब हम अपनी पसंद के कामों में वक्त बिताते हैं, अपनी पुरानी बातों को याद करते हैं और अपने दिल की आवाज़ सुनते हैं, तब जाकर हमें असली शांति मिलती है। यह कविता हमें यह संदेश देती है कि अपने लिए समय निकालना स्वार्थ नहीं, बल्कि खुद से प्यार करने का सबसे खूबसूरत तरीका है। हर किसी को कभी न कभी अपने लिए एक ऐसी शाम ज़रूर चुननी चाहिए, जहाँ सिर्फ वो हो और उसका अपना सुकून हो।


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