एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ,
उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ,
दुनिया की इस भाग-दौड़ से,
थोड़ा सा अब आराम लिखूँ,
भीड़ से दूर एक एकांत चुनूँ,
अपनी धड़कन का संगीत सुनूँ...!
ना कल की फिक्र, ना बीता कल हो,
बस सुकून का एक प्यारा सा पल हो,
कागज़ पर दिल के अरमान लिखूँ,
एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ...!
धुंधली पड़ गई जो अपनी ही सूरत,
तराशूँ उसे जैसे कोई खूबसूरत मूरत,
खुद से खुद की पहचान लिखूँ,
उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!
चाय की चुस्की में यादें घुली हों,
बंद आँखों में कुछ बातें खुली हों,
भीतर का परिंदा और ऊँची उड़ान लिखूँ,
एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ...!
बहुत जिए हम औरों की खातिर,
गवाएँ हैं पल ज़माने की खातिर,
अब अपनी हस्ती का ऊँचा मक़ाम लिखूँ,
उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!
जो बातें दिल में ही दबी रह गईं,
जो आँखें चुपचाप सब कह गईं,
उन खामोशियों को ज़ुबान लिखूँ,
एक खूबसूरत सी शाम लिखूँ,
उसमें खुद को खुद के नाम लिखूँ...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
● आप खुद के साथ समय बिताने के लिए क्या करना पसंद करते हैं ? (जैसे: चाय पीना, संगीत सुनना या लिखना)।
● क्या आपको भी कभी भीड़ से दूर अकेले रहने का मन करता है ?
● "खुद से खुद की पहचान" — इस बात पर आपके क्या विचार हैं ?
● आपके दिल का वो कौन सा सपना या 'उड़ान' है, जिसे आप अब जीना चाहते हैं ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।








2 Comments
Beautiful poetry ✨️
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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