__________________________ शिव भी आधा शक्ति भी आधी

शिव भी आधा शक्ति भी आधी

 ★ शिव भी आधा शक्ति भी आधी ★

आधा शिव है, आधी शक्ति,

यही प्रेम है, यही है भक्ति,

एक रूप में दो का वास,

जैसे हो चंदा और प्रकाश...!

एक तरफ है भस्म सुहानी,

दूजी तरफ चंदन की निशानी,

एक ओर है जटा निराली,

दूजी ओर रेशम की लाली...!

एक नयन में तेज भरा है,

दूजा नयन शीतल झरना है,

एक हाथ त्रिशूल उठाए,

दूजा हाथ सदा हाथ बँटाए...!

यह रूप हमें यह पाठ सिखाता,

स्त्री-पुरुष का अटूट नाता,

कठोर पुरुष में कोमल मन है,

नारी की शक्ति से ही जीवन है...!

कोई न पीछे, कोई न आगे,

दोनों एक ही प्रेम के धागे,

एक दूजे में जो खो जाते,

वही अर्धनारीश्वर हो जाते...!


🌸 शुक्रिया 🌸 


आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕


● शिव को 'भस्म' और शक्ति को 'चंदन' कहा गया है, आपको यह तुलना कैसी लगी ?


● क्या आज के समाज में स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक बन पा रहे हैं ?


● इस कविता से आपको जीवन की कौन सी सबसे बड़ी सीख मिली ?


● आपको शिव-शक्ति का 'अर्धनारीश्वर' रूप ज्यादा प्रभावित करता है या उनका अलग-अलग स्वरूप ?


● जो भी महादेव और माता पार्वती के इस अटूट प्रेम का सम्मान करते हैं, कमेंट में 'हर हर महादेव' लिखें।


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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1 Comments

  1. हर हर महादेव 🙏

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