★ अधूरी पर खूबसूरत ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता उन तमाम लम्हों और अहसासों के नाम है, जहाँ हम अक्सर खुद को दूसरों की उम्मीदों पर खरा उतारने या खुद की हर कमी को छुपाने की कोशिश करते रहते हैं। हम सोचते हैं कि परफेक्शन ही सब कुछ है, लेकिन सच तो यह है कि हमारे दिल के कुछ कोने और जिंदगी के कुछ पन्ने हमेशा अधूरे ही अच्छे लगते हैं। यह कविता किसी खामी को बुरा मानने के बजाय उसे अपनी खूबी और अपनी पहचान बनाने की एक छोटी सी कोशिश है। तो आइए, इस सफर में मेरे साथ जुड़िए और महसूस कीजिए कि कैसे हमारा यह अधूरापन ही हमारी असल खूबसूरती है...!
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मैं पूर्ण नहीं,
बस एक कोरा अहसास हूँ,
शायद अधूरी रहकर ही,
खुद के बहुत पास हूँ,
नहीं चाहिए पूर्णता का,
वह बोझिल सा ताज,
मेरी कमियों में ही छुपा,
मेरे होने का राज...!
ये कमियाँ ही तो हैं,
जो मुझे इंसान बनाती हैं,
और कुछ खूबियाँ,
जो गिरते हुए संभालती हैं,
नज़र का ही तो सारा,
खेल है इस जहान में,
तलाश क्या है तुम्हारी,
इस रूह के मकान में...!
चाहोगे तो हर मोड़ पर,
सिर्फ खामियां ही पाओगे,
देखोगे जो दिल से,
तो मेरी सादगी पे मर जाओगे,
या फिर डूबकर देखो,
मेरी अनकही कहानी में,
हर शख़्स एक किताब है,
कुछ पन्ने टूटे-बिखरे हैं,
पर उन्हीं बिखरे हिस्सों में,
असल रंग निखरे हैं...!
एक फैसला है तुम्हारा,
जो अब तुम्हें लेना है,
मेरे वजूद को,
किस नज़रिए का गहना देना है,
क्या कोशिश करोगे,
मुझे "ठीक" करने की बार-बार,
या फिर "समझकर" मुझे,
दोगे थोड़ा सा प्यार...!
अधूरी हूँ मैं सच है,
पर मेरी अपनी ही नूर है,
समझ सको तो "खास",
वरना कमियाँ भरपूर हैं...!
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👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● आपको इस कविता की कौन सी पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद आई ?
● क्या आपको भी लगता है कि अधूरापन ही इंसान को असली और खूबसूरत बनाता है ?
● अधूरी पर खूबसूरत—इन शब्दों को आप अपने जीवन से कैसे जोड़ते हैं ?
● क्या हमें लोगों को 'ठीक' करने की कोशिश करनी चाहिए या उन्हें वैसे ही 'स्वीकार' करना चाहिए ?
● आपकी ज़िंदगी की किताब का वो कौन सा 'बिखरा हुआ पन्ना' है जिसने आपको निखारा है ?
● इस कविता के भाव को आप एक शब्द में क्या नाम देना चाहेंगे ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-
इस कविता का सार यही है कि जिंदगी में किसी भी इंसान का पूर्ण या दोषमुक्त होना जरूरी नहीं है। हमारी कमियां, हमारे बिखरे हुए पन्ने और हमारे अधूरे सपने ही हमारी असली पहचान हैं जो हमें दूसरों से अलग और खास बनाते हैं। यदि हम दूसरों की नजरों में खुद को 'ठीक' करने की कोशिश छोड़ दें और अपने वास्तविक रूप को स्वीकार कर लें, तो जीवन का नजरिया ही बदल जाता है। अंततः, अधूरापन कोई कमजोरी नहीं, बल्कि वह खूबसूरती है जो हमें अंदर से मजबूत और जिंदादिल बनाती है। इसलिए अपनी इन कमियों को गले लगाइए, क्योंकि आप जैसे भी हैं, बेहद अनमोल और खूबसूरत हैं।
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2 Comments
It is true that i am incomplete but I have my own light , if u can understand then it is special otherwise there are many shortcomings.
ReplyDeleteLovely poetry
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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