__________________________ कलम की पुकार और किताबों का संसार

कलम की पुकार और किताबों का संसार


★ कलम की पुकार और किताबों का संसार ★

दोस्तों, आज की यह कविता 'कलम की पुकार और किताबों का संसार' उन सभी किताबों और पन्नों को समर्पित है, जो हमारे जीवन में सबसे अच्छे दोस्त की तरह होते हैं। डिजिटल होते इस दौर में कहीं न कहीं हम बंद किताबों की उस पुरानी महक, बचपन की परियों की कहानियों और डायरी में जज्बातों को उतारने के सुकून को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। इस कविता के ज़रिए मैंने उसी पुराने जुड़ाव, किताबों की बातें और हमारी कलम की ताकत को फिर से याद करने की एक छोटी सी कोशिश की है। आशा है, यह आपको आपके बचपन और पुरानी यादों के सफर पर ले जाएगी...!

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फिर थामने को हाथ, कलम मुझे बुलाती है,

वो पुरानी दोस्ती, फिर से याद आती है,

बंद किताबों की धूल, अब हटने को बेताब है,

उभर रहे वो अहसास, जैसे कोई ख्वाब है...!

★★✍️★★

किताबें बातें करती हैं, बस कोई सुनने वाला हो,

जज्बात कलम से कागज़ पर, कोई उतारने वाला हो,

आज की, कल की, और बीते हर एक पल की,

दास्तानें इनमें ज़िंदा हैं, खुशियों और हलचल की...!

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कभी जीत का जश्न है, कभी हार का साया है,

 इन पन्नों ने प्यार और दर्द, दोनों को सजाया है,

किताबें कुछ कहना चाहती हैं,

तुम्हारे पास रहना चाहती हैं...!

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परियों के किस्से, बचपन की यादें, फिर से कहने को,

इनमें खेत लहराते हैं, इनमें हौसले जगते हैं,

उम्मीदों के दिए यहाँ, बुझकर भी जलते हैं,

यहाँ मछली भी रानी है, और चिड़िया भी चहचहाती है,

ये जीना भी सिखाती हैं, ये उड़ना भी सिखाती हैं...!

★★✍️★★

इनमें सुबह की रौशनी है, और रातों की ख़ामोशी हैं,

ये तोड़ देती हैं मन की, हर एक मदहोशी,

किताबें कहती हैं "मैं हर राह में तुम्हारे साथ हूँ,

तुम अकेले नहीं मुसाफ़िर, मैं थामे तुम्हारा हाथ हूँ...!

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👉 शुक्रिया 👈 

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● आपकी वो कौन सी पहली किताब थी जिसने आपको पढ़ना सिखाया या प्रभावित किया ?

● क्या आपको भी बंद किताबों से आने वाली पुरानी कागज़ की महक पसंद है ?

● किताबों से सीखी हुई कोई एक बात, जो आपके हमेशा काम आती है ?

● क्या आपको आज भी परियों की कहानियाँ और बचपन के वो किस्से याद आते हैं ?

● क्या आप भी मानते हैं कि एक अच्छी किताब सबसे अच्छी दोस्त होती है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

'कलम की पुकार और किताबों का संसार' कविता उन बीते हुए पन्नों और स्याही के निशानों को फिर से जीवित करने का एक प्रयास है, जिन्हें हमने डिजिटल युग की चकाचौंध में कहीं पीछे छोड़ दिया है। यह कविता हमें इस सत्य का अहसास दिलाती है कि किताबें केवल कागजों का पुलिंदा नहीं, बल्कि हमारे बचपन की वे सुनहरी यादें और रूह के वे गहरे साथी हैं, जो आज भी हमारे अकेलेपन का सबसे बड़ा सहारा हैं। जब हम किताबों के पन्नों को पलटते हैं, तो हम केवल शब्दों को नहीं पढ़ते, बल्कि हम खुद के उन हिस्सों से मिलते हैं जो कहीं खो गए थे। यह कविता हमें इस बात का विश्वास दिलाती है कि दुनिया चाहे कितनी भी बदल जाए, किताबों की वह सादगी और कलम का वह जादू हमेशा हमारे साथ रहेगा। तो आइए, आज फिर से किताबों को अपना हमसफर बनाते हैं और अपने अंतर्मन को शब्दों की उन कहानियों से महकाते हैं, जो हमें जीने का हौसला और उड़ने का साहस देती हैं।

अगर आप मेरी पुरानी कविता पढ़ना चाहते हैं, तो [यहाँ क्लिक करें]

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1 Comments

  1. Wow kitabe such me hume bahut kuch sikhati hai lovely thoughts😊

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शब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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