__________________________ खुद की ओर लौटना

खुद की ओर लौटना

★ खुद की ओर लौटना ★

दोस्तो, आज की मेरी यह कविता "खुद की ओर लौटना" सिर्फ एक कविता नहीं है इस भागदौड़ भरी इस दुनिया में, हम अक्सर एक अदृश्य दौड़ का हिस्सा बन जाते हैं। इस दौड़ में हम दूसरों को खुश करने, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने और समाज द्वारा तय किए गए 'समझदार' होने के मानकों को पूरा करने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम खुद को ही भूल जाते हैं। हम अपने सपनों, अपनी पसंद और अपनी भावनाओं को किनारे रख देते हैं, जिससे धीरे-धीरे हमारे अंदर का इंसान खालीपन महसूस करने लगता है। "खुद की ओर लौटना" कविता उसी खोए हुए अस्तित्व की तलाश की एक विनम्र कोशिश है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि दूसरों का ख्याल रखना ज़रूरी है, लेकिन खुद को नज़रअंदाज़ करके नहीं। यह हमें अपने भीतर झांकने, अपनी रूह की आवाज़ सुनने और अपने आत्म-सम्मान को फिर से जागृत करने के लिए प्रेरित करती है। उम्मीद है आपको यह कविता पसंद आयेगी...!

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सुन मेरी झल्ली, सुन मेरी जान,

कहाँ खो गई तेरी अपनी पहचान,

औरों की खुशियों के महल उठाते-उठाते,

क्यों कर दिया खुद का आँगन वीरान...!

𝀈𝀈𝀈🍂𝀈𝀈𝀈

तूने ओढ़ी है जो ये 'समझदारी' की चादर,

ये तुझे सुकून नहीं, बस थकान देती है,

दूसरों की खातिर खुद को भुलाने की आदत,

तेरे अपने ही वजूद को बेजान करती है...!

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अब ज़रा अपनी रूह की भी सुन,

तेरा भी हक है कि तू जी भर के रोए,

आँखों के समंदर में सब बोझ तू धोए,

ज़रूरी नहीं हर बार औरों को संभालना,

कभी तो तू खुद की बाँहों में सोए...!

𝀈𝀈𝀈🍂𝀈𝀈𝀈

जो तेरे हैं, वो तेरी खामोशी भी पढ़ लेंगे,

वो हर मुश्किल में तेरे साथ ही रहेंगे,

लोगों की बातों को क्यों दिल से लगाना,

वो कल कुछ और थे, आज कुछ और कहेंगे...!

𝀈𝀈𝀈🍂𝀈𝀈𝀈

अब बहुत हुआ दूसरों के साए में जीना,

अपनी ही धूप में अब थोड़ा निखर तू,

मल्हम लगा उन जख्मों पर जो वक्त ने दिए,

खुद अपनी मोहब्बत से खुद को सँवार तू...!

𝀈𝀈𝀈🍂𝀈𝀈𝀈

उठा सर, खोल पंख और देख ये आसमाँ,

तेरे इंतज़ार में ये सारा जहान है,

अब बस खुद से इश्क कर, और कर बेइंतहा,

क्योंकि तेरी 'बिंदास उड़ान' ही अब तेरी शान है...!

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👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● क्या आप भी दूसरों की खुशी के लिए अपनी पहचान कहीं भूल गए हैं ?

● क्या आपको भी लगता है कि 'बहुत समझदार' होना कभी-कभी थकान देता है ?

● आप खुद को खुश रखने के लिए दिन भर में क्या एक छोटा काम करते हैं ?

● क्या आप अब अपनी खुशियों के लिए "उड़ान" भरने को तैयार हैं ?

● क्या आपके पास कोई ऐसा है जो आपकी खामोशी को भी पढ़ लेता है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

अगर आप मेरी पुरानी कविता पढ़ना चाहते हैं, तो [यहाँ क्लिक करें]

निष्कर्ष (Conclusion):-

अंत में, यह कविता हमें एक बहुत गहरा संदेश देती है—जीवन सिर्फ दूसरों के लिए जीने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने आप से प्यार करने और खुद को सम्मान देने की एक यात्रा भी है। जब हम 'समझदारी' की उस भारी चादर को उतार फेंकते हैं जो केवल थकान देती है, तभी हम वास्तव में निखर पाते हैं। अपने घावों पर मरहम लगाने की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी है, किसी और की नहीं। अपनी खुशियों के लिए पंख खोलना और एक नई "बिंदास उड़ान" भरना हमारा अधिकार भी है और ज़रूरत भी। याद रखें, जब आप खुद से प्यार करते हैं और अपनी अहमियत समझते हैं, तभी आप दुनिया के सामने अपनी असली चमक बिखेर सकते हैं। तो, आज से ही दूसरों की दुनिया से थोड़ा वक्त चुराइए और अपनी रूह के करीब लौट आइए, क्योंकि आपकी खुशियाँ ही आपकी सबसे बड़ी पहचान हैं।


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