★ मेरा सुकून लौटा दो ना ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता प्रेम में वियोग (बिछड़ने), अकेलेपन और अपने किसी खास इंसान की गहरी यादों को बहुत ही सुंदर और दिल को छू लेने वाले शब्दों में बयां करती है। जब कोई अपना बहुत दूर चला जाता है या जिससे बहुत अधिक प्रेम हो, उससे दूरी बन जाती है, तो इंसान के दिल पर क्या गुजरती है—इस दर्द को इस कविता में बड़े ही सहज तरीके से बया किया गया है।
कविता की शुरुआत इस अहसास से होती है कि किस तरह प्रिय से दूर रहने पर दिन काटना मुश्किल हो जाता है, सांसें तो चल रही होती हैं लेकिन जीवन का चैन और सुकून जैसे कहीं खो गया हो। यह कविता उन सभी प्रेमियों की भावनाओं का आईना है, जो अपने साथी की एक झलक और उसके साथ बिताए पलों के लिए तड़पते रहते हैं...!
𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈
पूरे छब्बीस दिन बीत गए हैं,
तुमको देखे, बात किए,
घुट-घुट कर मैं जी रही हूँ,
हाथों में खाली हाथ लिए,
कहने को तो साँसें चलती हैं,
पर ये साँसें मेरी कहाँ हैं,
पिंजरा यहाँ है मेरा,
पर मेरी जान तो तुम्हारे पास कैद है...!
𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈
इसे बेचैनी कहूँ या तलब कहूँ,
या कहूँ कि दम घुटता है,
जब याद तुम्हारी आती है,
तो अंदर कुछ-कुछ टूटता है,
जब से गए हो दूर मुझसे,
ये ज़िंदगी आधी हो गई,
हँसना तो जैसे भूल गई,
मैं आँसुओं की आदी हो गई...!
𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈
कैसे कहूँ मैं तुमसे कि,
मेरी हँसी मुझे लौटा दो,
कटती नहीं ये तन्हाई अब,
मुझे इस दर्द से बचा लो,
एक अजीब सा सूनापन है,
अन्दर कोई आवाज़ नहीं आती,
तुम तो चले गए दूर मगर,
तुम्हारी याद क्यूँ नहीं जाती?
तड़प रही हूँ मैं हर लम्हा,
जैसे बिन पानी प्यासा,
तुम बिन ऐसा लगता है,
जैसे मुझसे मेरी धड़कन ही,
छीन गई हो...!
𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈
लौट आओ ना मेरे पास,
अब और ना मुझे तड़पाओ तुम,
चूम कर मेरी भीगी पलकों को,
मेरी सारी उदासी चुरा लो ना,
इस मरती हुई दीवानी पर,
थोड़ा सा रहम खाओ ना,
मैं टूट कर बिखर जाऊँ,
उससे पहले आकर मुझे,
गले से लगा लो ना,
एक बार फिर से अपनी बाँहों में,
छुपा कर मुझे हँसा दो ना,
मर जाऊँगी मैं तुम्हारे बिना,
मुझे जबरदस्ती अपना बना लो ना,
मैं जी सकूँ फिर से,
मेरा वो खोया सुकून मुझे लौटा दो ना...!
𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-
● क्या आपने कभी अपने किसी बेहद करीबी से लंबे समय तक दूर रहने का दर्द झेला है ?
● क्या आपको भी किसी की याद में हंसना भूलकर रोना पड़ा है ?
● आपके अनुसार सच्चे प्यार की निशानी क्या होती है - दूरी या साथ ?
● क्या प्रिय के दूर जाने पर जीवन सच में अधूरा सा लगने लगता है ?
● इस कविता की कौन सी लाइन ने आपके दिल को सबसे ज्यादा छुआ ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
निष्कर्ष (Conclusion):-
इस प्रकार यह कविता केवल दो प्रेमियों के बिछड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सच्ची तड़प और गहरे अहसास का दस्तावेज है जो सच्चे प्रेम में ही संभव है। अंत में कवयित्री अपने प्रिय से यह गुहार लगाती है कि वह तमाम दूरियों को मिटाकर वापस लौट आए, क्योंकि उसके बिना जीवन अधूरा और अर्थहीन सा हो गया है।
कविता का शीर्षक "मेरा सुकून लौटा दो ना" इस पूरी कविता के भाव को पूरी तरह से समेट लेता है। यह संदेश देता है कि भौतिक चीजें या दुनिया की खुशियां चाहे जितनी मिल जाएं, लेकिन असली सुकून तो अपने प्रिय के पास ही मिलता है। अंततः यह कविता प्रेम की अमरता और उसके बिना होने वाली लाचारी को खूबसूरती से समाप्त होती है।
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