★ तुम वो खूबसूरत किताब हो ★
इश्क लिखूँ या तुम्हारा नाम लिखूँ,
समझ नहीं आता तुम्हें क्या लिखूँ,
सोचती हूँ कभी तुम्हें अपनी 'धड़कन' कह दूँ,
या फिर रूह में बसी अपनी 'जान' लिखूँ...!
𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈
तुम वो मुकम्मल और खूबसूरत किताब हो
जो दुनिया की नज़रों से अब भी अनजान हो,
तुम्हें पढ़ पाना मेरे बस की बात कहाँ,
तुम तो अनकहे सवालों का जवाब हो...!
𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈
तुम्हें पढ़ते-पढ़ते उम्र बीत जाएगी,
तुम्हें लिखते-लिखते ज़िंदगी कम पड़ जाएगी,
जो उतार दूँ तुम्हें पन्नों पर एक दफ़ा,
तो हर कोरी स्याही खुद ही 'किताब' बन जाएगी...!
𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈
कभी जज़्बात बन आँखों से बहते हो तुम,
तो कभी बनके ख़ामोशी लबों पे रहते हो तुम,
जी चाहता है तस्वीर तुम्हारी शब्दों से सजा दूँ,
अपनी हर अधूरी ख्वाहिश तुम्हारे नाम करा दूँ...!
𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈
तुम ही मेरी बंदगी, तुम ही मेरा जहान हो,
अब तुम ही बताओ,
तुम 'इश्क' हो या मेरी 'जान' हो,
इश्क लिखूँ या तुम्हारा नाम लिखूँ,
समझ नहीं आता तुम्हें क्या लिखूँ...!
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-
● पूरी कविता में आपको कौन सी बात सबसे ज्यादा पसंद आई ? 'धड़कन' या 'रूह में बसी जान' ?
● शायर उलझन में है कि क्या लिखे—आपकी नज़र में मोहब्बत को उसके नाम से पुकारना ज्यादा बेहतर है या सिर्फ 'इश्क' कहना ?
● क्या आपकी ज़िंदगी में भी कोई ऐसी 'किताब' (इंसान) है जिसे पढ़ते-पढ़ते उम्र गुज़ारने का दिल करता है ?
● इस कविता के लिए एक शब्द कहना हो, तो आप क्या कहेंगे ?
●लेखक ने अपनी हर अधूरी ख्वाहिश उसके नाम कर दी है। क्या कभी आपने किसी के लिए ऐसा महसूस किया है ?
● इश्क लिखूँ या नाम... इस उलझन पर आपकी क्या राय है ? नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें। 👇
निष्कर्ष (Conclusion):-
इस कविता का निष्कर्ष यह बताता है कि प्रेम सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक अनंत अनुभव है। कवि ने बहुत ही खूबसूरती से यह व्यक्त किया है कि उनके प्रिय को पढ़ने और समझने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकती; भले ही पूरी जिंदगी गुजर जाए, फिर भी उनके बारे में जानने के लिए बहुत कुछ शेष रह जाएगा। हर बार जब वे अपने प्रिय के करीब आते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे वे किसी नई किताब का एक नया अध्याय पढ़ रहे हों।
अंत में, यह कविता उन सभी जज्बातों का सार है जो शब्दों में पूरे नहीं हो पाते। चाहे कितनी भी स्याही खर्च हो जाए या शब्द कम पड़ जाएं, उस प्रिय की मोहब्बत का जादू हमेशा बरकरार रहेगा। यह रचना केवल एक कविता नहीं, बल्कि एक समर्पण है—एक ऐसी इबादत है जहाँ प्रेमी अपने प्रिय को ही अपनी बंदगी और अपना सारा जहान मान लेता है। यह कविता हमें यह सिखाती है कि जब कोई हमारे दिल में बस जाता है, तो उसे परिभाषाओं में नहीं, बल्कि केवल महसूस किया जाता है।
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1 Comments
Bahut sundar kavita
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌