★ कलम की उड़ान ★
मेरे हाथों में ये कोरा कागज़,
एक खाली सा मैदान है,
इसे अपनी सोच से भरना ही,
अब मेरी असली पहचान है,
मैं चाहती हूँ शब्दों के जुगनू,
रातों में बिखेर देना,
खामोश पड़े उन जज्बातों को,
अपनी एक मुकम्मल आवाज़ देना...!
सिर्फ शब्द नहीं पिरोने मुझे,
मुझे अपनी रूह उतारनी है,
किताब के किसी पुराने पन्ने पर,
एक अधूरी उम्र गुजारनी है,
लोग पढ़ेंगे मुझे जब,
तो उन्हें स्याही की गंध न आए,
हर लफ्ज़ में उन्हें अपनी ही,
कोई भूली याद नज़र आए...!
मैं चाहती हूँ उस सन्नाटे को लिखना,
जो अक्सर शोर में खो जाता है,
उस आँसू को शब्द देना,
जो आँखों की दहलीज पर सो जाता है,
मेरी कलम जब चले,
तो किसी के दर्द को राहत मिल जाए,
किसी टूटते हुए इंसान को,
जीने की नई चाहत मिल जाए...!
ये जो भीतर एक सैलाब है,
उसे समंदर तक ले जाना है,
मुझे मशहूर नहीं होना,
मुझे बस दिलों के अंदर जाना है,
मिट जाऊँगी एक दिन मैं,
पर मेरे शब्द यहीं रह जाएँगे,
वो खामोश रहेंगे फिर भी,
मेरी हर एक बात कह जाएँगे...!
सपनों की एक पोटली लेकर,
शब्दों के बाज़ार चली,
मैं तो बस अपनी रूह की खातिर,
बनने एक कलमकार चली,
थकूँगी नहीं, रुकूँगी नहीं,
जब तक पूरी मेरी बात न हो,
ऐसी मेरी कोई सुबह न हो,
जिसकी कलम से शुरुआत न हो...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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1 Comments
बहुत सुंदर कविता कलम की उड़ान ✍️
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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