__________________________ मरहम - सिसकियों से सजदा तक (भाग - 3 )

मरहम - सिसकियों से सजदा तक (भाग - 3 )




★ मरहम - सिसकियों से सजदा तक ★

( सुकून एक आगाज़ )

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'सुकून एक आगाज़' उस खूबसूरत अहसास को समर्पित है, जहाँ किसी खास का साथ मिलते ही जिंदगी के सारे शोर-शराबे एक मधुर संगीत में बदल जाते हैं। अक्सर जीवन की उलझनों और तन्हाई के अंधेरों में हम मरहम की तलाश करते हैं, लेकिन जब कोई हमारा हाथ थाम लेता है, तो वही दर्द एक नई खुशी में बदल जाता है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ पुरानी यादों के पन्ने फिर से महकने लगते हैं और हर डर एक सुकून भरी मुस्कान में खो जाता है। यह उस प्रेम की कहानी है जो न केवल दिल को राहत देता है, बल्कि हमारे बिखरे हुए संसार को फिर से एक सुंदर आगाज़ देता है। इस कविता को जरूर पढ़ें...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

न मरहम की तलाश अब, न कोई सवाल है,

तुम्हारी बाहों में सिमटा, मेरा हर हाल है,

खिड़की से आती धूप अब, चुभती नहीं मुझे,

तुम्हारे साथ होने का, ये कैसा कमाल है...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

जो बुझे थे दीये, वो मशाल बन गए,

उलझे हुए किस्से, अब मिसाल बन गए,

किताब के पुराने पन्ने, महकने लगे फिर से,

सादे से वो लफ्ज़, अब ख़्याल बन गए...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

अब न साँस घुटती है, न दिल घबराता है,

अँधेरा भी अब तुमको देख, पास आने से कतराता है,

सुलझ गई हूँ ऐसे, जैसे धागा हो रेशम का,

अंत हुआ तन्हाई का, और आगाज़ हुआ 'हम' का...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

न अब मंज़िल की जल्दी है, न रास्तों का डर है,

जहाँ तुम साथ चलते हो, वहीं अब मेरा घर है,

कल तक जो शोर था, वो संगीत बन गया,

खामोशी में भी अब, एक खूबसूरत असर है...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈

हाथों में हाथ तुम्हारा, जैसे दुआ का असर हो,

अब हर ढलती शाम, जैसे एक नई सहर ह,

मिट गए वो फासले, जो कभी दीवार थे,

सुकून का ये समंदर, अब ज़रा और गहरा हो...!

𝀈𝀈𝀈❣️𝀈𝀈𝀈


To be continued....


👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● कविता की कौन सी लाइन आपको सबसे ज्यादा 'सुकून' दे गई ?

● क्या आपकी जिंदगी में भी कोई ऐसा है, जिसके आने से 'शोर' अब 'संगीत' बन गया है ?

● आपको क्या लगता है, प्यार एक 'मरहम' है या बीते हुए पन्नों की 'महक' ?

● कविता का कौन सा शब्द आपके दिल के सबसे करीब रहा— 'आगाज़', 'दुआ' या 'सुकून' ?

● इस कविता को अपने उस खास इंसान के साथ शेयर करें या उन्हें टैग करें जो आपके लिए 'घर' जैसा है।

●  नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें। 

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लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

'सुकून एक आगाज़' यह दर्शाती है कि प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह न केवल हमारे घावों को भर सकता है, बल्कि हमारे जीवन के जीने का नजरिया भी बदल सकता है। जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ होते हैं जो हमें बिना कहे समझ लेता है, तो मंजिल की चिंता और रास्तों का डर अपने आप खत्म हो जाता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी जीवन में बहुत कुछ बदलने की जरूरत नहीं होती, बस किसी का साथ और उनका भरोसा ही हमें जीने की नई वजह दे जाता है। अंत में, सच्चा प्रेम वह है जो खामोशी में भी एक खूबसूरत असर पैदा करे और दो रूहों के मिलन से जिंदगी में सुकून का एक नया समंदर ले आए। उम्मीद है कि यह कविता आपके दिल को छुएगी और आपको अपनों के साथ की मिठास को और करीब से महसूस करने के लिए प्रेरित करेगी।


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