__________________________ खामोशी

खामोशी

 

★ खामोशी ★

दोस्तों, आज की यह कविता 'खामोशी' उस दर्द और अनकही दास्तान को समर्पित है, जो अक्सर हमारे अपनों की बेरुखी और अनदेखी के कारण जन्म लेती है। जब बरसों की मेहनत और यादों से बुने रिश्ते, चंद झूठे बहानों और जिद की भेंट चढ़ जाते हैं, तब दिल में एक गहरा सन्नाटा पसर जाता है। इस कविता के माध्यम से मैंने उन जज्बातों को शब्दों में पिरोने की कोशिश की है, जो शोर भरी दुनिया के बीच अक्सर खामोश रह जाते हैं। उम्मीद है कि अपनों के साथ की उस अधूरी कहानी को बयां करती यह कविता आपके दिल के किसी कोने को ज़रूर छुएगी...!


𝀈𝀈𝀈🌛𝀈𝀈𝀈

वो जो चाँद था,

अब बादलों में कहीं खो गया है,

सितारों से पूछो,

ये दिल कितना तन्हा हो गया है,

ज़मीन पर ढूँढा जिसे,

वो अब फलक का किस्सा है,

मेरी कहानी का सबसे,

खूबसूरत पर अधूरा हिस्सा है...!

𝀈𝀈𝀈🌛𝀈𝀈𝀈

बरसों की मेहनत थी,

यादों की एक एक ईट से जोड़ी थी,

पर एक ज़िद की आंधी ने,

हर उम्मीद ही तोड़ दी,

वो रिश्ते जो कभी,

मिसाल हुआ करते थे जमाने में,

आज तमाशा बन गए,

चंद झूठे बहाने में...!

𝀈𝀈𝀈🌛𝀈𝀈𝀈

दिन तो गुजर जाता है, 

दुनिया की भाग-दौड़ में,

अजीब बेचैनी होती है,

रातों के इस अंधेरे में,

आज सन्नाटा चीखता है,

और खामोश है जुबाँ...!

𝀈𝀈𝀈🌛𝀈𝀈𝀈

परवाह की जगह अब,

अनदेखी का पहरा है,

ये जख्म पुराना नहीं,

आज भी बहुत गहरा है,

 किस्मत रूठी है तो क्या,

 दिल में यादें साथ है,

कभी बातों के दरिया खत्म नहीं होते थे,

आज सिर्फ ख़ामोशी हैं...!

𝀈𝀈𝀈🌛𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● क्या आपको भी लगता है कि कुछ कहानियाँ अधूरी रहकर ही ज्यादा खूबसूरत होती हैं ?

● क्या कभी आपने रातों के सन्नाटे में अपनी ही यादों को चीखते हुए महसूस किया है ?

जब गहरे रिश्ते 'झूठे बहानों' की भेंट चढ़ जाते हैं, तो उस वक्त खुद को कैसे संभालना चाहिए ?

● क्या आपके पास भी कोई ऐसी यादों का घर है जिसे आपने सालों की मेहनत से संजोया था ?

● आज के दौर में सच्ची 'परवाह' ज्यादा देखने को मिलती है या सिर्फ 'अनदेखी' का पहरा ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

'खामोशी' महज एक शब्द नहीं, बल्कि उन जज्बातों का सागर है जिन्हें हम बयां नहीं कर पाते। यह कविता हमें इस कठोर सत्य का बोध कराती है कि कभी-कभी जिंदगी में जो सबसे खूबसूरत होता है, वही सबसे अधूरा रह जाता है। जब रिश्तों में परवाह की जगह अनदेखी ले लेती है, तो शब्द भी अपना अर्थ खो देते हैं और अंत में बस एक खामोशी ही बचती है। लेकिन यह खामोशी हार नहीं है, बल्कि उस दर्द को स्वीकार करने का एक तरीका है। कभी-कभी अधूरे रिश्ते हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखा जाते हैं। याद रखिए, अगर किस्मत रूठ भी जाए, तो भी अपनी यादों के उस सुंदर हिस्से को हमेशा संजोकर रखें, क्योंकि वही तो है जो हमें यह अहसास दिलाता है कि हमने कभी किसी को पूरी शिद्दत से चाहा था।

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