__________________________ भ्रष्टाचार का अंधेरा

भ्रष्टाचार का अंधेरा

  ★ भ्रष्टाचार का अंधेरा ★

दोस्तो, आज की मेरी यह कविता 'भ्रष्टाचार का अंधेरा' पर लिखी गई हैं। आज के समय में हम चारों तरफ एक ऐसी व्यवस्था देखते हैं, जहाँ आम इंसान मेहनत करता है, लेकिन उसका फल किसी और की जेब में चला जाता है। हमारी यह कविता 'भ्रष्टाचार का अंधेरा' उसी पीड़ा की एक आवाज़ है। जब हम चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे सुनते हैं, तो हमें लगता है कि अब सब कुछ बदल जाएगा। लेकिन सत्ता की कुर्सी पाते ही वही लोग आम आदमी के संघर्षों को भूलकर महलों में आराम से बैठ जाते हैं।

इस कविता के माध्यम से मैंने उन कड़वे सच को कुरेदने की कोशिश की है, जो अक्सर दफ्तरों की फाइलों के नीचे दबे रह जाते हैं। क्या ईमानदारी अब वाकई एक कमजोरी बन गई है? क्या गरीब का पसीना केवल चंद लोगों की अमीरी बढ़ाने के लिए है? यह कविता इन्हीं सवालों का आईना है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम कब तक इस व्यवस्था का हिस्सा बने रहकर चुपचाप सब कुछ सहते रहेंगे...!

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बड़े-बड़े वादे करके,

सबने कुर्सी पाई है,

मगर देश की किस्मत में,

बस धोखा ही नसीब में आई है,

नेता जी मुस्कुराते हैं,

महलों के अंदर बैठ के,

जनता यहाँ सिसक रही,

महँगाई की मार लपेट में...!

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गरीबों का पसीना था,

जो सरकारी में जमा था,

लुटेरों ने उसे लूटा,

जैसे वो कोई इनाम था,

कहीं सोने की चोरी है,

कहीं वतन को बेचा है,

क्या इसीलिए शहीदों ने,

अपना खून मातृभूमि पर सींचा है...!

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दफ्तर जाओ तो,

बिना दाम के काम नहीं होता,

बेईमानों के चेहरे पर,

अब शर्म का नाम नहीं होता,

फाइलें दबी रहती हैं,

जब तक जेब गरम ना हो,

क्या इंसानों के दिल में,

अब थोड़ी भी शरम नहीं हैं...!

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पर याद रहे ये बात उन्हें,

जो देश को खा रहे हैं,

वे अपनी ही कब्र यहाँ,

खुद ही खोदते जा रहे हैं,

जब जागेगी ये देश की जनता,

तो सिंहासन भी हिलेगा,

हर एक बेईमान का यहाँ,

फिर कच्चा चिट्ठा खुलेगा...!

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भारत देश हमारा प्यारा है,

इसे हमें बचाना होगा,

भ्रष्टाचार को जड़ से, अब

हमें मिटाना होगा...!

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👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद,भ्रष्टाचार के प्रति मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● नेता जी वोट मांगते समय तो हाथ जोड़ते हैं, पर जीतने के बाद गायब क्यों हो जाते हैं? क्या आपके इलाके में भी ऐसा होता है ?

● अमीर और अमीर हो रहा है, और गरीब महंगाई में पिस रहा है। इसका असली जिम्मेदार आप किसे मानते हैं ?

● क्या बढ़ती महंगाई के पीछे आपको भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण लगता है ? अपनी राय दें।

● हम अक्सर सिस्टम को दोष देते हैं, पर क्या हम खुद कभी छोटे कामों के लिए रिश्वत देकर इस सिस्टम को बढ़ावा नहीं देते ?

● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें ?

लेखिका के कलम से (निष्कर्ष):-

अंत में, मैं बस इतना कहना चाहूँगी कि भ्रष्टाचार का यह अंधेरा सिर्फ एक बुराई नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की प्रगति में एक सबसे बड़ा कांटा है। यदि हम इसे जड़ से मिटाना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत हम सभी को अपने स्तर पर करनी होगी। अक्सर हम नेताओं और सिस्टम को कोसते हैं, लेकिन क्या हम खुद कभी-कभी छोटे कामों के लिए रिश्वत देकर इस सिस्टम को बढ़ावा नहीं देते ? देश को बचाना सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हम सभी का फर्ज है। जिस भारत को हमारे वीरों ने अपने बलिदान और खून से सींचा है, उसे भ्रष्टाचार की दीमक से बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। याद रखिए, जिस दिन आम जनता की जागरूकता जागेगी, उसी दिन सिंहासन पर बैठे उन बेईमानों का 'कच्चा चिट्ठा' खुलेगा। आइए, आज हम यह संकल्प लें कि इस अंधेरे को हटाकर हम फिर से एक ईमानदार और खुशहाल भारत का निर्माण करेंगे। क्योंकि देश हमारा है, और इसकी सुरक्षा के लिए हम ही अपनी आवाज़ उठा सकते हैं।

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