★ उम्मीद की एक सुलगती लौ ★

उम्मीद की एक सुलगती लौ,

आँखों में नमी है,

और दिल में है एक भारीपन,

अंकों की इस दौड़ में,

जैसे हार गया है मन,

वो घर की उम्मीदें,

वो माँ-बाप का चेहरा,

आज उदासी के बादलों का,

मुझ पर है पहरा...!

दुनियां की बातें और खुद से ये तकरार,

 लगता है जैसे थक कर,

अब मैं गई हूँ हार,

पर सुन ऐ लड़की!

तू सिर्फ एक 'रिजल्ट' नहीं है,

तेरे वजूद की दास्ताँ,

इतनी भी छोटी नहीं हैं...!

माना आज अंधेरा घना है,

राह नहीं दिखती,

पर हौसलों की स्याही से ही,

किस्मत हैं लिखी जाती,

ये वक्त एक पड़ाव है,

मंजिल अभी बाकी है,

तू खुद अपनी ताकत बन,

यही तेरी साखी है...!

रो ले जी भर के आज,

पर कल फिर से मुस्कुराना,

अपनी मेहनत से दुनिया को,

अपनी जिद् दिखाना,

परिवार की तू लाडली है,

उनका अभिमान बनेगी,

आज की ये नाकामी ही,

कल तेरी पहचान बनेगी...!


🌸 शुक्रिया 🌸 


आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕


● इस कविता की कौन सी लाइन आपको सबसे ज्यादा मोटिवेट करने वाली लगी ?


● क्या कभी आपको भी लगा है कि आप 'सिर्फ एक रिजल्ट' से कहीं बढ़कर हैं ?


● मुश्किल वक्त में आपकी सबसे बड़ी ताकत कौन बनता है—परिवार या आपकी खुद की जिद्द ?


● क्या आप मानते हैं कि आज की नाकामी ही कल की सफलता की नींव बनती है ?


● उस लड़की को आप कमेंट में क्या कहना चाहेंगे जो आज हार मानकर बैठी है ?


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।