★ अरपा माँ का मैला आँचल ★
दोस्तों, आज की हमारी यह कविता 'अरपा माँ का मैला आँचल' बिलासपुर की जीवनदायिनी अरपा नदी के प्रति हमारी लापरवाही और उससे उपजे दर्द को बयां करती है। एक समय था जब यह नदी हमारे शहर की शान और पवित्रता का प्रतीक हुआ करती थी, लेकिन आज यह अपनी ही बदहाली पर आँसू बहा रही है।
इस कविता में मैंने उसी कड़वी सच्चाई को सरल शब्दों में लिखने की कोशिश की है, जहाँ हमने विकास की दौड़ में अपनी माँ समान नदी को कचरे और प्रदूषण का ढेर बना दिया है। यह रचना सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि हम सबके लिए एक आईना है जो हमें हमारी जिम्मेदारी का एहसास दिलाती है।
अगर आप भी प्रकृति और अपनी मिट्टी से प्यार करते हैं, तो यह कविता आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। इसे पूरा ज़रूर पढ़ें और विचार करें कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या विरासत सौंप रहे हैं...!
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वो जिसके आँचल में खेलकर,
यह शहर जवान हुआ,
आज उसी के सीने पर,
क्यों प्रदूषण का निशान हुआ,
कभी जिसे छूने भर से,
रूह पवित्र हो जाती थी,
आज उसी की दुर्गंध से,
हर साँस थम सी जाती है...!
कहाँ गए वो पचरी घाट,
जहाँ भोर की आरती होती थी,
जहाँ अरपा की लहरें,
तट पर चाँदी जैसी चमकती थी,
अब तो बस कीचड़ का पहरा,
और प्लास्टिक की काई है,
हमने ही अपनी माँ की,
ये दुर्दशा बनाई है...!
बिलासपुर की धड़कन थी जो,
अब बोझ ढो रही है,
अपने ही बच्चों की बेरुखी पर,
छुप-छुप रो रही है,
सारे शहर की गंदगी को,
उसने अपने भीतर समेटा है,
पर देखो कैसा पत्थर दिल आज,
उसका हर एक बेटा है...!
वो रेत की चमक छिन गई,
अब कालिख का साम्राज्य है,
मछलियाँ दम तोड़ रहीं,
कैसा यह कलयुगी राज्य है,
नदी नहीं, वो बहता हुआ,
एक गहरा ज़ख्म बन गई है,
हमारी प्यास बुझाते-बुझाते,
खुद ही गंदगी में दब गई है...!
अगर आज न जागे हम तो,
बस रेत का ढेर बचेगा,
आने वाला कल हमसे,
फिर कड़े सवाल पूछेगा,
चलो उठाएँ हाथ कि फिर से,
इसे स्वच्छ बनाना है,
अरपा की उस खोई मुस्कान को,
वापस लेकर आना है...!
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● अरपा नदी के तट या पचरी घाट से जुड़ी आपकी सबसे सुंदर याद क्या है ?
● आपके हिसाब से नदी को सबसे ज़्यादा नुकसान किससे हो रहा है—सीवरेज, प्लास्टिक या हमारी अनदेखी ?
● क्या नदी में गंदगी फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाना ही एकमात्र समाधान है ?
● अरपा उत्थान और 'अरपा रिवर व्यू' प्रोजेक्ट के बारे में आप क्या सुझाव देना चाहेंगे ?
● आप व्यक्तिगत रूप से अरपा को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए क्या योगदान दे सकते हैं ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-
इस कविता का मुख्य उद्देश्य केवल अरपा नदी की दुर्दशा दिखाना नहीं, बल्कि हमें यह अहसास दिलाना है कि 'अरपा माँ' का आँचल हम सभी की जिम्मेदारियों से जुड़ा है। जिस नदी ने हमें जीवन दिया, आज वही हमारी बेरुखी के कारण घुट रही है। यह कविता हमें आईना दिखाती है कि अगर हमने अभी भी अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो आने वाली पीढ़ियों को हम सिर्फ एक सूखा और प्रदूषित नाला ही विरासत में दे पाएंगे।
अतः, यह समय केवल पछताने का नहीं, बल्कि हाथ से हाथ मिलाकर नदी को पुनर्जीवित करने का है। आइए, हम संकल्प लें कि अरपा की खोई हुई मुस्कान और उसकी पवित्रता को वापस लाने के लिए अपना छोटा सा योगदान जरूर देंगे, ताकि यह नदी फिर से बिलासपुर की जीवनदायिनी बनकर मुस्कुरा सके।
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1 Comments
Save River 🙏
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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