__________________________ अरपा माँ का मैला आँचल

अरपा माँ का मैला आँचल

 ★ अरपा माँ का मैला आँचल ★

वो जिसके आँचल में खेलकर,

यह शहर जवान हुआ,

आज उसी के सीने पर,

क्यों प्रदूषण का निशान हुआ, 

कभी जिसे छूने भर से,

रूह पवित्र हो जाती थी,

आज उसी की दुर्गंध से,

हर साँस थम सी जाती है...!

कहाँ गए वो पचरी घाट,

जहाँ भोर की आरती होती थी,

जहाँ अरपा की लहरें,

तट पर चाँदी जैसी चमकती थी,

अब तो बस कीचड़ का पहरा,

और प्लास्टिक की काई है,

हमने ही अपनी माँ की,

ये दुर्दशा बनाई है...!

बिलासपुर की धड़कन थी जो,

अब बोझ ढो रही है,

अपने ही बच्चों की बेरुखी पर,

छुप-छुप रो रही है,

सारे शहर की गंदगी को,

उसने अपने भीतर समेटा है,

पर देखो कैसा पत्थर दिल आज,

उसका हर एक बेटा है...!

वो रेत की चमक छिन गई,

अब कालिख का साम्राज्य है,

मछलियाँ दम तोड़ रहीं,

कैसा यह कलयुगी राज्य है,

नदी नहीं, वो बहता हुआ,

एक गहरा ज़ख्म बन गई है,

हमारी प्यास बुझाते-बुझाते,

खुद ही गंदगी में दब गई है...!

अगर आज न जागे हम तो,

बस रेत का ढेर बचेगा,

आने वाला कल हमसे,

फिर कड़े सवाल पूछेगा,

चलो उठाएँ हाथ कि फिर से,

इसे स्वच्छ बनाना है,

अरपा की उस खोई मुस्कान को,

वापस लेकर आना है...!



🌸 शुक्रिया 🌸 


आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕


● अरपा नदी के तट या पचरी घाट से जुड़ी आपकी सबसे सुंदर याद क्या है ?


● आपके हिसाब से नदी को सबसे ज़्यादा नुकसान किससे हो रहा है—सीवरेज, प्लास्टिक या हमारी अनदेखी ?


● क्या नदी में गंदगी फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाना ही एकमात्र समाधान है ?


● अरपा उत्थान और 'अरपा रिवर व्यू' प्रोजेक्ट के बारे में आप क्या सुझाव देना चाहेंगे ?


● आप व्यक्तिगत रूप से अरपा को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए क्या योगदान दे सकते हैं ?


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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