★ वो शाम आए ★
तन्हाइयों की महफ़िल में अक्सर,
एक ख़्वाब अधूरा रहता है,
यूँ तो बातें दिल में हज़ारों हैं,
पर लबों पे शिकवा रहता है,
थक गए हम इन यादों के साए से,
अब तो दिल की यही दुआ है,
काश कोई ऐसी शाम आए,
जिसमें तेरी याद नहीं,तू ख़ुद आए...!
धुंधली सी उन पुरानी बातों में,
अब वो पहले जैसी बात नहीं,
यादें तो बस एक साया हैं,
तसल्ली देने वाली रात नहीं,
महसूस करूँ मैं छुअन तेरी,
हक़ीक़त बन कर तू पास आए,
काश कोई ऐसी शाम आए,
जिसमें तेरी याद नहीं,तू ख़ुद आए...!
ये वक़्त की ज़ालिम बेड़ियाँ,
अब और सही नहीं जातीं,
तेरी तस्वीर से की गई बातें,
अब रूह को नहीं भातीं,
मैं पुकारूँ और तू सामने हो,
आँखों को ऐसा सुकूँ आए,
काश कोई ऐसी शाम आए,
जिसमें तेरी याद नहीं,तू ख़ुद आए...!
सूरज ढले, पंछी लौटें,
जैसे सब अपने घर जाते हैं,
हम आज भी उस मोड़ पे खड़े,
सिर्फ़ तेरी यादें पाते हैं,
सिमट जाए ये दूरियों का सफ़र,
मुकम्मल होने का लम्हा आए,
काश कोई ऐसी शाम आए,
जिसमें तेरी याद नहीं,तू ख़ुद आए...!
🌸 शुक्रिया 🌸
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
● इस कविता की कौन सी पंक्ति आपके दिल के सबसे करीब रही ?
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● "तस्वीर से बातें करना" या "सामने बैठकर बात करना"—आपके लिए क्या ज्यादा भावुक है ?
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2 Comments
Lovely ❤️
ReplyDeleteसिमट जाए ये दूरियों का सफ़र,
ReplyDeleteमुकम्मल होने का लम्हा आए,
काश कोई ऐसी शाम आए,
जिसमें तेरी याद नहीं,तू ख़ुद आए...!❤️
शब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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