__________________________ शिव भी आधा शक्ति भी आधी

शिव भी आधा शक्ति भी आधी

 ★ शिव भी आधा शक्ति भी आधी ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता "शिव भी आधा शक्ति भी आधी" उस प्यारे रिश्ते के बारे में है जो स्त्री और पुरुष को एक-दूसरे का पूरक बनाता है। जैसे शिव और शक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, वैसे ही एक साथ मिलकर ही जीवन सुंदर और संपूर्ण बनता है।

इस कविता में मैंने उसी खास जुड़ाव को लिखा है, जहाँ कठोरता और कोमलता मिलकर एक हो जाती हैं। यह कविता हमें यही सिखाती है कि सच्चा प्यार और सम्मान ही एक रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है।

अगर आप भी प्रेम और समर्पण के इस खूबसूरत भाव को महसूस करते हैं, तो यह कविता आपको बहुत अच्छी लगेगी। इसे पूरा ज़रूर पढ़ें...!

一ー🌹一ー

आधा शिव है, आधी शक्ति,

यही प्रेम है, यही है भक्ति,

एक रूप में दो का वास,

जैसे हो चंदा और प्रकाश...!

一ー🌹一ー

एक तरफ है भस्म सुहानी,

दूजी तरफ चंदन की निशानी,

एक ओर है जटा निराली,

दूजी ओर रेशम की लाली...!

一一🌹一ー

एक नयन में तेज भरा है,

दूजा नयन शीतल झरना है,

एक हाथ त्रिशूल उठाए,

दूजा हाथ सदा हाथ बँटाए...!

一ー🌹一ー

यह रूप हमें यह पाठ सिखाता,

स्त्री-पुरुष का अटूट नाता,

कठोर पुरुष में कोमल मन है,

नारी की शक्ति से ही जीवन है...!

一ー🌹一ー

कोई न पीछे, कोई न आगे,

दोनों एक ही प्रेम के धागे,

एक दूजे में जो खो जाते,

वही अर्धनारीश्वर हो जाते...!

一ー🌹一ー

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕

अगर आप मेरी पुरानी कविता पढ़ना चाहते हैं, तो [यहाँ क्लिक करें]

कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● शिव को 'भस्म' और शक्ति को 'चंदन' कहा गया है, आपको यह तुलना कैसी लगी ?

● क्या आज के समाज में स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक बन पा रहे हैं ?

● इस कविता से आपको जीवन की कौन सी सबसे बड़ी सीख मिली ?

● आपको शिव-शक्ति का 'अर्धनारीश्वर' रूप ज्यादा प्रभावित करता है या उनका अलग-अलग स्वरूप ?

● जो भी महादेव और माता पार्वती के इस अटूट प्रेम का सम्मान करते हैं, कमेंट में 'हर हर महादेव' लिखें।

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

 लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

"शिव भी आधा शक्ति भी आधी" कविता हमें इस महान सत्य से रूबरू कराती है कि पुरुष और स्त्री अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस तरह शिव के बिना शक्ति अधूरी है और शक्ति के बिना शिव, उसी प्रकार एक संपूर्ण जीवन की कल्पना इन दोनों के मिलन के बिना असंभव है। यह कविता हमें यह सिखाती है कि कठोरता और कोमलता का तालमेल ही रिश्तों को मजबूती और दिव्यता प्रदान करता है।

अंततः, यह कविता 'अर्धनारीश्वर' के उस पवित्र स्वरूप का सम्मान करती है, जो हमें बराबरी, विश्वास और अटूट प्रेम का पाठ पढ़ाता है। जब हम एक-दूसरे के अस्तित्व का सम्मान करते हुए साथ चलते हैं, तभी हम जीवन को सही मायने में पूर्ण कर पाते हैं। यह कविता हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि सच्चा प्रेम वही है, जहाँ दो रूहें मिलकर एक हो जाती हैं और एक-दूसरे की कमियों को अपनी खूबियों से पूरा करती हैं।

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1 Comments

  1. हर हर महादेव 🙏

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