__________________________ बर्दाश्त करने की हद

बर्दाश्त करने की हद

 

★ बर्दाश्त करने की हद ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'बर्दाश्त करने की हद' उस अनकही दास्तान को समर्पित है, जिसे हम अक्सर अपनों की खुशी की खातिर अपने भीतर ही दबा लेते हैं। कई बार हम दूसरों को छत देने और उनकी मुस्कुराहट बनाए रखने के लिए खुद के गमों को पूरी तरह भुला देते हैं, और एक ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहाँ हमारा धैर्य जवाब देने लगता है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ एक इंसान बेटी, बहन और दोस्त के रूप में रिश्तों का बोझ उठाते-उठाते भीतर से टूट जाता है। 'बर्दाश्त करने की हद' का अर्थ केवल थकान नहीं, बल्कि उस मौन विद्रोह की शुरुआत है, जहाँ अब और झूठ बोलकर मुस्कुराना संभव नहीं रह जाता। उम्मीद है कि यह कविता उन सभी के दिलों को छू पाएगी, जिन्होंने कभी न कभी खुद को दूसरों के लिए मिटाकर यह महसूस किया है कि अब और सहने की गुंजाइश नहीं बची...!

一ー一😥一ー一

मैं वो दीवार थी,

जो सबको छत देती रही,

सबकी खुशियों की खातिर,

अपनी खुशियां देती रही,

मैंने हर ग़म को छुपाया, 

एक मुस्कान के पीछे, 

पर आज जो गिर गई हूँ मैं,

अपनी ही नजरों में,

तो समझ लेना कि बर्दाश्त,

करने की हद खत्म हो गई है...!

一ー一😔一ー一

मैं वो बेटी, वो बहन,

वो दोस्त बनी रही,

जो अंदर से टूटकर भी,

सबके लिए खड़ी रही,

कभी किसी ने पूछा नहीं,

मैं अंदर से कैसी हूँ,

सबने बस यही देखा,

कि मैं बाहर से कैसी हूँ,

पर आज जो टूटी हूँ मैं,

एक सूखे पत्ते की तरह,

तो समझ लेना कि बर्दाश्त,

करने की हद खत्म हो गई है...!

                             一ー一😔一ー一

बहुत वक़्त तक चुप रही,

कि कोई बुरा न माने,

सबकी खुशियाँ ढूँढती रही,

खुद को बिना जाने,

मगर अब थक गई हूँ मैं,

ये बोझ उठाते-उठाते,

पर अब जो बह निकले हैं,

ये आँसू बेहिसाब,

तो समझ लेना कि बर्दाश्त,

करने की हद खत्म हो गई है...!

一一ー😔一ー一

अब और नहीं है हिम्मत,

कि कोई झूठ बोलूँ,

आँखों के इन आँसुओं को,

मुस्कुराहट में घोलूँ,

अगर आज रो पड़ी हूँ मैं,

तुम्हारे सामने आकर,

तो समझ लेना कि बर्दाश्त,

करने की हद खत्म हो गई है...!

一ー一😥一ー一

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● क्या आपको भी लगता है कि अक्सर सबसे ज्यादा मुस्कुराने वाला इंसान ही अंदर से सबसे ज्यादा टूटा होता है ?

● क्या कभी आपके जीवन में ऐसा मोड़ आया है जब आपकी "बर्दाश्त करने की हद" खत्म हो गई हो ?

● इस कविता की कौन सी पंक्ति आपके दिल को सबसे ज्यादा छू गई ?

● अपनों की खुशी के लिए खुद को भूल जाना—क्या यह त्याग सही है या गलत ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

 लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

इस कविता का अंत एक ऐसी सच्चाई को सामने लाता है, जहाँ अब आंसुओं को मुस्कुराहट के पीछे छुपाना नामुमकिन है। 'बर्दाश्त करने की हद' हमें यह एहसास दिलाती है कि एक हद के बाद अपने जज्बातों को दबाना न केवल खुद के लिए, बल्कि रिश्तों की सादगी के लिए भी नुकसानदेह होता है। जब कोई अपनी भावनाओं को पूरी तरह खोकर सिर्फ अपनों के लिए जीता है, तो एक दिन उसका टूटना स्वाभाविक है। यह कविता हमें यह संदेश देती है कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी गरिमा बनाए रखने का अधिकार है। अंत में, यह कविता सिर्फ दर्द बयां नहीं करती, बल्कि हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि अपनों का ख्याल रखते-रखते कहीं हम खुद को ही तो नहीं खो रहे? उम्मीद है कि यह कविता आपको यह समझने में मदद करेगी कि खुद की जरूरतों और अपनी खुशी को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।

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4 Comments

  1. बहुत सुंदर

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  2. Nice one 👍

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  3. Beautiful poetry

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  4. Radhika mehra7 May 2026 at 21:01

    Khud ko kisi ke liye nahi bhulna chahiye duniya selfish hai khud ki sochna chahiye.

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