__________________________ तेरे सादगी को ( शब्दों से सजाना चाहतीं हूँ )

तेरे सादगी को ( शब्दों से सजाना चाहतीं हूँ )

★ तेरे सादगी को ★

 ( शब्दों से सजाना चाहतीं हूँ )

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'तेरी सादगी को' है। यह कविता उन खूबसूरत और पवित्र अहसासों को समर्पित है जिन्हें मैं अपनी कलम और शब्दों से सजाना चाहती हूँ। अक्सर हमारे जीवन की भागदौड़ भरी दुनिया में, हम उन लोगों को नजरअंदाज कर देते हैं जो चमक-धमक से दूर, अपनी सादगी और निश्छलता से ही हमारा दिल जीत लेते हैं। मेरी यह कविता किसी ऐसे ही खास व्यक्ति के सरल स्वभाव, उनकी आंखों की गहराई और उनके निश्छल प्रेम का एक छोटा सा दर्पण है। इन पंक्तियों में मैंने केवल शब्द नहीं लिखे, बल्कि अपने दिल की धड़कनों को पिरोने की कोशिश की है। मुझे उम्मीद है कि ये शब्द आप सभी के दिलों तक पहुंचेंगे और आप भी उस सादगी को महसूस कर पाएंगे जो मैंने महसूस की है। तो आइए, मेरे साथ इन शब्दों के इस भावुक और सुकून भरे सफर में शामिल हों...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

तेरे लबों पे वो प्यारा सा मुस्कान,

बातों में बसे वो सीधा सादा पहचान,

तेरे मन के वो साफ़ और सच्चे उड़ान,

ज़िन्दगी की ये सादगी, तू ही है मेरी जान,

मैं तेरे शख्सियत को गहराई से पढ़ना चाहती हूँ,

तेरे सादगी को,

अपने शब्दों से सजाना चाहती हूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

तेरे आँखों में जो गहरा समझदारपन है,

मुश्किलों में भी जो तेरा शांत मन है,

तूने जो थामा मेरी ये ज़िम्मेदारी है,

सच कहूँ तो तेरा ये सादगी ही प्यारा है,

मैं तेरे साथ हर मुश्किल से लड़ना चाहती हूँ,

तेरे सादगी को,

अपने शब्दों से सजाना चाहती हूं...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

तेरे दिल में बसे उस सच्चे प्यार को,

मेरे लिए धड़कते तेरे हर एक एहसास को,

मुझ पर किए गए तेरे उस अटूट विश्वास को,

मैं हर पल हर लम्हा तुझमें ढलना चाहती हूँ,

तेरे सादगी को,

अपने शब्दों से सजाना चाहती हूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

तेरा हाथ थामना जैसे कोई दुआ मिल जाना,

भटके हुए मुसाफिर को घर का पता मिल जाना,

तेरे एक हंसी में छिपा है मेरा सारा संसार,

जैसे पतझड़ के बाद आई हो पहली बहार,

मैं तेरे साये में उम्र भर ठहरना चाहती हूँ,

तेरे सादगी को,

अपने शब्दों से सजाना चाहती हूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

जब वक़्त के साथ चेहरे पर लकीरें आयेंगे,

पुरानी यादें जब हमें फिर से हंसाएंगे,

तब मेरी ये बातें तेरे कानो में गुनगुनाएंगे

जब तक है साँस, तू ही मेरे पास रहेगा,

मैं आखिरी पल तक तेरा हाथ पकड़ना चाहती हूँ,

तेरे सादगी को,

अपने शब्दों से सजाना चाहती हूँ...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈


👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● चेहरे की चमक तो वक्त के साथ ढल जाएगी, पर मन की सच्चाई हमेशा साथ रहती है। मेरी इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल के सबसे करीब लगी ?

● आपके हिसाब से एक रिश्ते में सबसे जरूरी क्या है प्यार, सादगी या भरोसा ? 

● सादगी या खूबसूरती ? आपको इस कविता में क्या ज्यादा पसंद आया ?

● आपकी नजर में एक परफेक्ट पार्टनर की सबसे बड़ी खूबी क्या होनी चाहिए ?

● कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें ।

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 लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

अंत में, यह कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक वादा है। यह उस विश्वास और साथ को बयां करती है जो समय के थपेड़ों के बाद भी अडिग रहता है। कवयित्री ने बहुत खूबसूरती से यह जताया है कि प्रेम का असली अर्थ किसी की बाहरी सुंदरता में नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व की पवित्रता और उसके साथ बिताए गए हर पल के महत्व को समझने में है। भले ही वक्त के साथ उम्र ढल जाए और यादें पुरानी हो जाएं, पर एक-दूसरे का हाथ थामे रहने का संकल्प ही रिश्ते को अमर बनाता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि प्यार का सबसे सुंदर रूप वही है, जो बिना किसी दिखावे के, पूरी तरह सादगी से भरा हो।


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वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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