★ मेरी रूह और तुम ★
दोस्तों, आज की यह कविता 'मेरी रूह और तुम' उस सच्ची और रूहानी मोहब्बत की दास्तान है जो दुनिया की बंदिशों, फासलों और बदनामी से कहीं ऊपर होती है। जब प्यार सिर्फ एक दिल्लगी न रहकर सीधे जान पर बन आती है, तब इंसान को समझ आता है कि असल में मोहब्बत होती क्या है। इस कविता के माध्यम से मैंने उसी तड़प, आईने में दिखने वाले अक्स, और दूरियों के बाद भी धड़कनों में बसे रहने वाले उस खास अहसास को शब्दों का रूप देने की कोशिश की है—एक ऐसा प्यार जो मौत के बाद भी कब्र से महकता रहेगा। उम्मीद है कि रूह से रूह के इस अटूट जुड़ाव को समेटती यह कविता आपके दिल को ज़रूर छुएगी...!
✰✰✰♥️✰✰✰
लोग तो बातें बनाते ही थे हमारे नाम की,
बदनाम तो हम हमेशा से थे आपकी मोहब्बत में,
मगर पहले सिर्फ दिल्लगी थी,
अब जान पर बन आई है,
अभी तो बस समझ आई है,
कि मोहब्बत होती क्या है...!
अजीब दस्तूर है तुम्हारी वफ़ाओं का भी,
फासले बढ़ा लिए पर धड़कनों से जाते नहीं,
रूह में बसे हो और खुद को अजनबी कहते हो,
ये कैसी बेरुखी है कि पहचानते तक नहीं मुझे,
जबकि आईना देखूँ तो अक्स तुम्हारा ही दिखता है...!
मैं चाहूँ भी तो तुम्हें खुद से जुदा नहीं कर सकती,
उस खुशबू को मिटाना मेरे बस की बात नहीं,
मैं मर भी जाऊँ तो मेरी कब्र से वही महक आएगी,
जिसमें आपकी मोहब्बत आज भी महकती है...!
𝀈𝀈𝀈●𝀈𝀈𝀈👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● क्या आपने कभी किसी को इतनी शिद्दत से चाहा है कि खुद में भी वही नजर आने लगे ?
● क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि कोई रूह में तो बसा हो, पर सामने अजनबी बन कर खड़ा हो ?
● क्या दूरियां वाकई प्यार कम कर पाती हैं ?
● क्या प्रेम मृत्यु के बाद भी जीवित रहता है ?
● मोहब्बत में दुनिया की बातों से डरना चाहिए या अपनी रूह की सुननी चाहिए ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करे।
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लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-
यह कविता हमें प्रेम के उस ऊंचे और पवित्र स्तर से रूबरू कराती है, जहाँ शरीर से परे रूहों का मिलन होता है। सच्ची मोहब्बत का मतलब केवल पास होना या साथ दिखना नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की रूह में इस तरह बस जाना है कि दुनिया की बंदिशें, समाज का डर और दूरियों के फासले बेअसर हो जाएं। जब प्यार इतना गहरा हो जाता है कि प्रेमी को खुद के भीतर ही अपने प्रिय का अक्स (परछाई) नजर आने लगे, तो फिर शारीरिक दूरी का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यह अहसास हमें यह भी बताता है कि प्रेम मृत्यु जैसे अटल सत्य से भी कहीं अधिक शक्तिशाली है। जो रूह से रूह का रिश्ता होता है, वह न तो समय के साथ कम होता है और न ही मृत्यु के बाद समाप्त होता है। वह तो एक ऐसी खुशबू की तरह है जो हमेशा महकती रहती है। अंततः, यह कविता हमें यह संदेश देती है कि अगर प्यार में रूहानियत हो, तो वह रिश्ता दुनिया की तमाम मुश्किलों को पार कर अमर हो जाता है। प्रेम की यह शक्ति ही जीवन को जीने का एक नया और गहरा अर्थ प्रदान करती है।

2 Comments
❤️❤️
ReplyDelete♥️💙♥️💙
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌