★ 'आशा' की गूँज ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'आशा की गूँज' हमारे आधुनिक जीवन के उस कड़वे सच को बयां करती है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। आज हम एक ही छत के नीचे रहते हुए भी तकनीकी की दुनिया में इतने खो गए हैं कि अपनों से दूरी बढ़ती जा रही है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ प्यार तो बहुत है, लेकिन सम्मान और संवाद की कमी रिश्तों में दरार डाल रही है। यह कविता उस दर्द को आवाज़ देती है जो 'मकान' को 'घर' बनाने के लिए तरसता है और उन खामोश सवालों को सामने लाती है, जो हम अपनों से पूछना तो चाहते हैं पर कह नहीं पाते। उम्मीद है, यह कविता उन लम्हों को बयां कर पाएगी जो शब्दों से ज्यादा हमारे व्यवहार की उपेक्षा में महसूस किए जाते हैं। इस कविता को जरूर पढ़ें...!
一ー一⛺️一ーー
सजाया घर जिसे मैंने, वो सिर्फ एक मकान नहीं,
थकान शामिल है इसमें मेरी, ये सिर्फ मुकाम नहीं।
तुम अपनी फोन की दुनिया में यूँ ही खोए रहते हो,
हम पास होकर भी साथ हैं, ये अब गुमान नहीं।
सम्मान कोई तोहफा नहीं, जो साल में एक बार मिले,
जो रूह में न उतरे हर रोज़, वो सम्मान नहीं।
मेरे 'फ़र्ज़' को बस 'कर्तव्य' का ही नाम मत देना,
मैं भी एक इंसान हूँ, महज़ कोई बेज़बान नहीं।
ऊँचे महलों की कोई खास चाहत नहीं है मुझे,
पर तुम्हारी उपेक्षा सहे, अब ये जान नहीं।
मेरे ख़्वाबों को पैरों तले यूँ न कुचला करो तुम,
रिश्ता बराबरी का है, ये कोई फरमान नहीं।
मेरी खामोशी में दफन हैं हज़ारों गहरे सवाल,
बाहर से शांत हूँ, पर अंदर मचे तूफान हैं ।
प्यार बहुत है, मगर 'आदर' की कमी खलती है,
जहाँ इज़्ज़त न हो, समझो वो सच्चा जहान नहीं।
चलो फिर से "हम" बनें, छोड़ें ये "मैं" और "तुम",
रिश्ता सिर्फ एक निभाए, ऐसा कोई अरमान नहीं...!
👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● एक रिश्ते में आपके लिए सबसे ज्यादा मायने क्या रखता है—प्यार या इज्जत ?
● क्या आपको भी लगता है कि फोन की वजह से लोग एक ही कमरे में बैठकर भी एक-दूसरे से दूर हो गए हैं ? (हाँ/नहीं)
● आपके हिसाब से एक 'मकान' को 'घर' कौन सी चीज बनाती है ?
● क्या आप भी कभी-कभी अपनी बात कहने के बजाय चुप रहना पसंद करते हैं ?
● क्या एक मजबूत रिश्ते में दोनों का हक बराबर होना चाहिए, या किसी एक को झुकना पड़ता है ?
● कविता की कौन सी लाइन आपको अपने दिल के सबसे करीब लगी ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
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लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-
'आशा की गूँज' केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक बदलाव की पुकार है। जब हम 'मैं' और 'तुम' की दीवारें गिराकर 'हम' के धरातल पर मिलते हैं, तभी रिश्तों में वास्तविक खुशहाली आती है। यह कविता हमें यह याद दिलाती है कि किसी भी रिश्ते की बुनियाद केवल प्यार नहीं, बल्कि एक-दूसरे का सम्मान और बराबरी का हक है। जब हम अपनी खामोशियों को दूर कर, दिल से बात करना शुरू करते हैं, तभी घर का सूनापन दूर होता है। उम्मीद है कि यह कविता आपके मन को झकझोर देगी और आपको अपने रिश्तों के महत्व को फिर से नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करेगी।


2 Comments
Beautiful
ReplyDeleteLovely 🌹
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌