__________________________ आशा की नई किरण (part - 2)

आशा की नई किरण (part - 2)



★ 'आशा' की नई किरण ★

दोस्तों, आज की यह कविता 'आशा की नई किरण' उन रिश्तों की कहानी है जो कहीं न कहीं खो गए थे। अक्सर भागदौड़ भरी जिंदगी में हम भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनों की खामोशियों और उनकी जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। यह कविता उस एहसास को बयां करती है जहाँ एक छोटी सी समझदारी और अपनी गलती को स्वीकार करने की हिम्मत, दूरियों को मिटाकर रिश्तों में नई जान फूंक सकती है। यह 'मैं' और 'तुम' से आगे बढ़कर 'हम' बनने की एक खूबसूरत शुरुआत है, जहाँ शिकायतों की जगह आपसी समझ और साथ जीने का वादा है। इस कविता को जरूर पढ़ें...!

𝀈𝀈𝀈⛺️𝀈𝀈𝀈

तेरी खामोशी की आवाज़, मेरे दिल तक आई है,

हाँ सच है कि मैंने ही, ये दूरियाँ बढ़ाई हैं...!

मैं सामान लाता रहा, घर भरने की चाहत में,

पर देख न सका कि तेरी, आँखों में तन्हाई है...!

𝀈𝀈𝀈🙇‍♀️𝀈𝀈𝀈

वो फ़ोन की दुनिया झूठी थी, मैं उसमें खो गया था,

तेरा थका हुआ चेहरा, मुझे अब दिखाई दी है...!

भूल गया था मैं कि सुकून, अपनों के पास होता है,

पैसों की इस दौड़ में, बस वक्त का ह्रास होता है...!

𝀈𝀈𝀈🙇‍♀️𝀈𝀈𝀈

तू घर की दीवार नहीं, मेरी दुनिया की जान है,

मेरे वजूद की 'आशा', तू ही मेरी परछाईं है...!

अब 'मैं' और 'तुम' नहीं, अब 'हम' बनकर जिएँगे,

वफा की इस नई सुबह ने, एक अँगड़ाई ली है...!

𝀈𝀈𝀈🙇‍♀️𝀈𝀈𝀈

सुलझाऊँगा वो उलझनें, जो अनकही रह गई थीं,

मिटाऊँगा वो दूरियाँ, जो खामोशी कह गई थीं...!

हाथ थाम कर तेरा, फिर उन्हीं गलियों में चलेंगे,

जहाँ खुशियाँ हमारे इंतज़ार में, पलकें बिछाए बैठी थीं...!

𝀈𝀈𝀈🙇‍♀️𝀈𝀈𝀈

तेरे सपनों की उड़ान अब, मेरी ज़िम्मेदारी है,

ये रिश्ता निभाने की नहीं, साथ जीने की साझेदारी है...!

धूप हो या छाँव, अब हर सफर साथ तय करेंगे,

पुराने जख्मों पर अब, प्यार का मरहम भरेंगे...!

मिटा कर अंधेरे पुराने, एक नई कसम खाते हैं,

चलो 'आशा' की छाँव में, हम अपना घर बसाते हैं...!

𝀈𝀈𝀈⛺️𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● इस कविता का कौन सा हिस्सा आपके दिल को सबसे ज्यादा छू गया और क्यों ?

● "फ़ोन की दुनिया झूठी थी, मैं उसमें खो गया था"— क्या आपको भी लगता है कि मोबाइल ने अपनों के बीच खामोशी बढ़ा दी है ?

● आपके हिसाब से एक मकान को 'घर' बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज़ क्या है ?

● क्या एक रिश्ते में अपनी गलती मान लेना उसे टूटने से बचाने का सबसे सही तरीका है ?

● "ये रिश्ता निभाने की नहीं, साथ जीने की साझेदारी है"— इस पंक्ति पर आपकी क्या राय है ?

● आपके जीवन में 'आशा' का क्या महत्व है? क्या कभी किसी छोटी सी पहल ने आपके किसी पुराने रिश्ते में नई जान फूँकी है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

यह कविता हमें यह सिखाती है कि रिश्ता निभाना केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सपनों और जिम्मेदारियों की साझेदारी करना है। जब हम अपने अहंकार को छोड़कर प्यार का मरहम लगाना सीखते हैं, तभी अंधेरे छंटते हैं और 'आशा' की नई किरण दिखाई देती है। रिश्तों में सुधार के लिए संवाद और साथ की बहुत अहमियत होती है, जो पुराने जख्मों को भर सकते हैं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी एक सही फैसला और एक नई कसम हमारे बिखरे हुए संसार को फिर से संवार सकती है और जीवन में खुशियों का नया सवेरा ला सकती है।


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