__________________________ अनकही मंज़िल

अनकही मंज़िल

★ अनकही मंज़िल ★

दोस्तों, आज की यह कविता 'अनकही मंज़िल' दो दिलों के एक ऐसे अटूट और खामोश रिश्ते को बयां करती है, जहाँ शब्दों की नहीं बल्कि सिर्फ जज्बातों की ज़रूरत होती है। जिंदगी के इस सफ़र में जब कोई ऐसा मिल जाता है जिसके साथ बिना कुछ कहे भी सुकून महसूस हो, तो वहीं हमारी हर तलाश खत्म हो जाती है। पुरानी सभी कड़वाहटों को भुलाकर एक नई शुरुआत करने और प्यार के इसी अनकहे अहसास को मैंने इन खूबसूरत पंक्तियों में ढालने की कोशिश की है। आशा है, यह आपके दिल के जज्बातों से मेल खाएगी...!

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खामोशियों की तह में, चलो खुद को तलाश करते हैं,

बिना कहे एक दूजे का, अब हम विश्वास करते हैं...!

न लफ्ज़ होंगे होंठों पर, न बातों का ही डेरा होगा,

जहाँ सिर्फ तुम ठहरोगे, वहीं अब घर मेरा होगा...!

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पुराने सब गिले-शिकवे, हवा में हम उड़ा देंगे,

मोहब्बत की नई खुशबू, फिज़ाओं में जगा देंगे...!

ज़माने की बंदिशों से, चलो अब दूर चलते हैं,

जहाँ दो दिल, सिर्फ़ अपनी ही धड़कन में पिघलते हैं...!

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न कोई शर्त होगी अब, न कोई वादा चाहेंगे,

तुम्हारी एक मुस्कुराहट में, हम जन्नत पा ही जाएंगे...!

चलो तन्हाई की चादर, ज़रा सी और बुनते हैं,

जहाँ रूहें बात करती हैं, वो सन्नाटे को सुनते हैं...!

➢👫➣

हकीकत हो या सपना हो, तुम्हें ही पास पाएँ हम,

सुकूँ की उस गुज़ारिश में, मुकम्मल हो ही जाएँ हम...!

𝀈𝀈𝀈🥀𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया  👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

● क्या आपके पास भी कोई ऐसी बात है जो 'अनकही' रह गई, पर आज भी आपके दिल के करीब है ?

● आपके लिए 'सुकून' का मतलब क्या है—किसी का साथ, या बस एक शांत लम्हा ?

● क्या आपको भी लगता है कि पुरानी यादों को हटाकर नई शुरुआत करना ज़रूरी है ?

● इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल को सबसे ज्यादा छू गई ?

● क्या आपने कभी किसी के साथ ऐसी खामोशी साझा की है, जहाँ शब्दों की ज़रूरत ही न पड़ी हो ?

● उलझे हुए रिश्तों को सुलझाने के लिए आपकी नज़र में सबसे ज़रूरी चीज़ क्या है—माफ़ी या बाते ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

लेखिका की कलम से (निष्कर्ष):-

'अनकही मंजिल' कविता उस अहसास का नाम है, जहाँ शब्द मौन हो जाते हैं और दिल की धड़कनें एक-दूसरे की भाषा समझ लेती हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि सच्ची मोहब्बत किसी शर्त या वादों की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह तो उस भरोसे का नाम है जो खामोशियों के बीच भी सुकून ढूँढ लेता है। पुराने गिले-शिकवों और दुनिया की बंदिशों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत करना ही जीवन का सबसे खूबसूरत पड़ाव है। अंत में, यह कविता हमें यही संदेश देती है कि जब रूहें एक-दूसरे में सिमट जाती हैं, तो वही 'अनकही मंजिल' ही जीवन का अंतिम और सबसे पवित्र गंतव्य बन जाती है, जहाँ न कोई सवाल होता है, न कोई मलाल, बस एक-दूसरे का साथ ही जन्नत होता है।

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1 Comments

  1. Agar rishte uljhe hai to ek maaf se suljh jate gai.jisko suljhna hi nahi hai uske liye maafi bhi zaruri nahi hai 💯💥

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