__________________________ तुम और मैं

तुम और मैं

★ तुम और मैं ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'तुम और मैं' उन प्रेमियों को समर्पित है, जो भले ही इस दुनिया की मजबूरियों के कारण एक न हो सके, लेकिन जिनकी रूहें हमेशा एक-दूसरे के करीब रही हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि प्यार का मतलब साथ रहना है, पर यह कविता उस अहसास की गहराई को उजागर करती है जहाँ प्रेम किसी राजा या पद का मोहताज नहीं, बल्कि रूह का एक अटूट संगीत है। यह उन लोगों के लिए है जो दूर होकर भी एक-दूसरे की धड़कनों में बसते हैं और जिनका भरोसा इस अटूट सत्य पर है कि सच्ची मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती, वह बस अपना ठिकाना बदल लेती है। उम्मीद है कि यह कविता आपके दिल के उन कोमल अहसासों को छू जाएगी, जो आपने किसी खास के लिए सहेज रखे हैं...।

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लोग कहते हैं हमारा प्यार,

अधूरा रह गया,

पर तुम्हारे आने से,

मेरा हर सपना पूरा हो गया,

दुनिया ने तो बस हमारे,

आंसू और जुदाई देखी,

पर हमने एक-दूसरे में,

खुदा की परछाई देखी...!

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तुम कोई राजा नहीं थे,

ना कोई बड़ा मुकाम था,

पर मेरी हर सांस पर,

बस तुम्हारा ही नाम था,

जब भी तुमने गिटार छुआ,

और कोई धुन गाई,

मुझे लगा जैसे मेरी ही,

रूह मुस्कुराई...!

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हाँ हम इस दुनिया में,

एक ना हो सके,

साथ हँस ना सके,

चैन से सो ना सके,

पर दूर रहकर भी,

तुम मेरे सबसे पास हो,

जिंदगी ख़त्म हो जाए,

पर तुम हमेशा खास हो...!

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अब मुझे अकेलेपन का,

कोई डर नहीं सताता,

तुम्हारा एहसास मुझे,

हर पल जीना सिखाता है,

हम फिर मिलेंगे उस जहाँ में,

जहाँ कोई बंदिश नहीं होगी,

सिर्फ़ तुम होगे, मैं होगी,

और हमारी मोहब्बत होगी...!

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👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● क्या आपको भी अपने प्यार में भगवान का रूप नज़र आता है ?

● क्या आपके पास भी कोई ऐसी धुन या गाना है, जिसे सुनते ही किसी खास की याद आ जाती है ?

● क्या आप इस बात से सहमत हैं कि दिल से जुड़े लोग दूर होने पर भी पास लगते हैं ?

● क्या आपको भी यकीन है कि सच्ची मोहब्बत करने वाले अगले जन्म या किसी और दुनिया में ज़रूर मिलते हैं ?

● क्या किसी की यादें इंसान को अकेलेपन में भी जीना सिखा सकती हैं ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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निष्कर्ष (Conclusion):-

'तुम और मैं' हमें यह अहसास दिलाती है कि प्रेम का अर्थ सिर्फ साथ होना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भीतर खुदा को देखना है। भले ही दुनिया इसे 'अधूरा' कहे, पर जो रूह से जुड़ी हुई मोहब्बत है, वह कभी अधूरी नहीं होती; वह तो बस अगले जन्म या किसी दूसरी दुनिया में मिलने का एक सुंदर वादा होती है। यह कविता हमें सिखाती है कि जब कोई हमारी रूह में बस जाता है, तो अकेलापन डर नहीं, बल्कि उस साथ का एक मीठा अहसास बन जाता है। अंत में, सच्चा प्रेम वह है जो हर बंधन से आजाद होकर, आने वाले हर कल में भी सिर्फ 'तुम और मैं' के होने की गवाही देता है।

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