__________________________ तक़दीर की कलम

तक़दीर की कलम

★ तकदीर की कलम ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'तकदीर की कलम' उस संकल्प को समर्पित है जिसे हम अक्सर भाग्य के भरोसे छोड़ देते हैं—हमारा भविष्य। अक्सर जीवन में एक ऐसा पड़ाव आता है, जहाँ मुश्किलें और पुरानी नाकामियां हमें जकड़ लेती हैं, लेकिन यह कविता इस बात का अहसास दिलाती है कि हमारी तकदीर की कलम हमारे ही हाथों में है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ हम अपने दिल के पुराने घावों को मिटाकर, एक नई शुरुआत की हिम्मत जुटाते हैं। 'तकदीर की कलम' का मतलब केवल बेहतर भविष्य की कल्पना करना नहीं, बल्कि अपने साहस और मेहनत से उन बादलों को भी अपने पक्ष में लिखना है, जो कभी राह में बाधा बने थे। उम्मीद है, यह कविता उन अनकहे हौसलों को आवाज़ दे पाएगी जो हर इंसान के भीतर कहीं दबे हुए हैं...!

一ー一ー✍️一ー一ー

अपनी तकदीर के हर बादल मैं ही लिखूँगी,

अपनी हिम्मत का वो पागलपन मैं ही लिखूँगी,

ज़मीन पर जो बिछड़ गए, वो रास्ते पुराने थे,

अब बादलों के ऊपर अपना सिंहासन मैं ही लिखूँगी...!

一ー一ー✍️一ー一ー

माना कि ज़िंदगी तेरे बिना अधूरी रहेगी,

पर इस कमी को अपनी मजबूरी न लिखूँगी,

तू नहीं है साथ, तो क्या हुआ ऐ हमसफ़र,

मैं अपनी जीत का अब नया जश्न लिखूँगी...!

一ー一ー✍️一ー一ー

काली घटाओं को चीर कर जो धूप निकलेगी,

उस सुनहरी चमक का दर्शन मैं ही लिखूँगी,

फाड़ दिए वो पन्ने जिनमें मैं हारी हुई थी,

अब ऊँचाइयों पर अपनी धड़कन मैं ही लिखूँगी...!

                         一ー一ー✍️一ー一ー

तू हिस्सा था गुज़रे हुए कल का,

अब आने वाले कल का अभिनंदन मैं ही लिखूँगी,

आसमान गवाह है, मेरी उड़ान का,

अपनी जीत का हर बादल मैं ही लिखूँगी...!

一ー一ー✍️一ー一ー

👉 शुक्रिया 👈

आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-

● क्या आप भी अपनी तकदीर खुद लिखने में यकीन रखते हैं ?

● इस कविता को पढ़कर आपके मन में क्या शब्द आया ? (जैसे: हिम्मत, जीत या उड़ान)

● क्या पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ना ही असली जीत है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

 लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

इस कविता का अंत एक शक्तिशाली संदेश के साथ होता है—कि बीते कल की कड़वी यादों और हार के पन्नों को फाड़कर आगे बढ़ना ही असली जीत है। 'तकदीर की कलम' हमें याद दिलाती है कि हम अपने भविष्य के निर्माता स्वयं हैं। चाहे रास्ते कितने भी कठिन क्यों न हों, अपनी मेहनत की धूप से हम काली घटाओं को चीरकर एक नई और सुनहरी शुरुआत कर सकते हैं। अंततः, यह कविता हमें आत्मविश्वास से भर देती है और यह अहसास कराती है कि जब हम खुद पर भरोसा करते हैं, तो पूरा आसमान हमारी उड़ान का गवाह बनता है। यह साहस और उम्मीद का एक ऐसा संकल्प है जो किसी को भी अपने सपनों की ऊंचाइयों तक पहुँचने की प्रेरणा देता है।

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