__________________________ गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य

गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य

 ★ गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य' उस पवित्र रिश्ते को समर्पित है जो एक इंसान को सिर्फ पढ़ाता नहीं, बल्कि उसे जीवन जीना सिखाता है—हमारा गुरु और शिष्य का रिश्ता। अक्सर शिक्षा की दौड़ में हम केवल किताबों के बोझ और अंको के दबाव में खो जाते हैं, लेकिन यह कविता उस सच्चे मार्गदर्शक को नमन है जो छात्र के डगमगाते कदमों को थामकर उसमें नया सवेरा भर देता है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ एक गुरु कुम्हार की तरह शिष्य की कच्ची मिट्टी रूपी जीवन को आकार देता है और शिष्य अपनी मेहनत से उस ज्ञान को सार्थक बनाता है। उम्मीद है, यह कविता उन अनकहे एहसासों को बयां कर पाएगी, जो एक गुरु की सीख और छात्र के विश्वास के बीच खामोशी से पनपते हैं...!

𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

शिक्षक का संकल्प...!

मैं केवल अक्षर नहीं,

तुम्हें जीवन जीना सिखाऊँगा,

तुम्हारी आँखों की नमी को,

मैं मुस्कान बनाऊँगा,

तू गिरना, तू थकना,

मगर कभी हार मत मान लेना,

मैं वो हाथ हूँ,

जो हर मुश्किल में तुझे थाम जाऊँगा...!

𝀈𝀈𝀈🙏𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈🙏𝀈𝀈𝀈

छात्र की पुकार...!

कभी किताबों का बोझ है,

कभी उम्मीदों का डेरा,

घनी है रात नाकामियों की,

कब होगा सवेरा?

गुरुवर! जब डगमगाते हैं कदम,

इस दुनिया के शोर में,

आपका एक शब्द भर देता है,

मुझमें नया सवेरा...!

𝀈𝀈𝀈🙏𝀈𝀈𝀈

𝀈𝀈𝀈🙏𝀈𝀈𝀈

साझा संगम...!

एक कच्ची मिट्टी की मूरत है,

एक कुम्हार की कला,

दोनों के मिलने से ही तो,

ज्ञान का पावन दीप जला,

कोई अंक तय नहीं करेंगे,

हमारे कल की ये कहानी,

शिक्षक की मेहनत सफल होगी,

जब छात्र लिखेगा नई कहानी...!

𝀈𝀈𝀈🙏𝀈𝀈𝀈


𝀈𝀈𝀈✍️𝀈𝀈𝀈

👉 शुक्रिया 👈 

आपकी अपनी 🌹 

अहसास डायरी 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● इस कविता की कौन सी लाइन आपके दिल को छू गई ?

● आपके जीवन में आपके शिक्षक का क्या योगदान रहा है ?

● अपने उस पसंदीदा शिक्षक का नाम लिखें जिन्होंने आपको गिरकर संभलना सिखाया।

● क्या आप भी मानते हैं कि अंक (Marks) नहीं, बल्कि सीख जीवन की कहानी लिखती है ?

● एक छात्र के रूप में आपको सबसे बड़ी चुनौती क्या लगती है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

इस कविता का अंत एक ऐसी उपलब्धि की तरह है, जहाँ शिक्षक की मेहनत और छात्र का संकल्प मिलकर एक नई कहानी लिखते हैं। 'गढ़ता गुरु, निखरता शिष्य' हमें यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की मुश्किलों में हार न मानने का साहस है। जब एक गुरु ज्ञान का दीपक जलाता है और शिष्य उसे अपनी मेहनत से आगे ले जाता है, तभी समाज का वास्तविक निर्माण होता है। यह कविता अंत में हमें यह अहसास दिलाती है कि हम सबके जीवन में कोई न कोई ऐसा मार्गदर्शक जरूर होता है, जिसने हमें खुद पर यकीन करना सिखाया है। उम्मीद है कि यह कविता आपको आपके उन गुरुओं की याद दिलाएगी, जिन्होंने आपको जीवन की सही दिशा दिखाई और आपको एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित किया।

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3 Comments

  1. Exam badi chunoti hai mere liye to😔

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  2. Love this poetry

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  3. Dipesh chaudhary6 August 2026 at 11:54

    Students are incomplete without teachers.

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