__________________________ हम का नया सवेरा (part -3)

हम का नया सवेरा (part -3)

 ★ 'हम' का नया सवेरा ★

दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'हम का नया सवेरा' उस सुकून भरे पड़ाव की दास्तान है, जहाँ गलतफहमियों के बादल छंट चुके हैं और रिश्तों में फिर से नई उम्मीद की रोशनी आई है। जब हम अपने अहंकार और छोटी-छोटी शिकायतों को पीछे छोड़कर अपनों के करीब आते हैं, तो वही 'मकान' फिर से एक प्यार भरा 'घर' बन जाता है। यह कविता उन जज्बातों का निचोड़ है, जहाँ 'मैं' और 'तुम' की कड़वाहट को भुलाकर, अब 'हम' साथ मिलकर एक नई शुरुआत करने का वादा करते हैं। यह प्यार और आपसी समझ का वह खूबसूरत मिलन है, जो किसी भी रिश्ते को फौलाद जैसी मजबूती देता है। उम्मीद है, यह कविता उन लम्हों को बयां कर पाएगी जो शब्दों से ज्यादा एक-दूसरे के प्रति समर्पण में महसूस किए जाते हैं। इस कविता को जरूर पढ़ें...!

一ー一⛺️一ー一

आपकी आँखों के आँसू, मेरी रूह को भिगो गए,

जो कल तक पराये थे, आज फिर अपने हो गए,

माना कि इस मकान को 'घर', सिर्फ आपने बनाया है,

मेरी हर एक कामयाबी में, बस आपका ही साया है...!

一ー一😊一ー一

अब फोन की वो आभासी दुनिया, पीछे छूट जाएगी,

बातों की मीठी खनक, अब घर में गूँज पाएगी,

न सम्मान सिर्फ साल भर का, न तोहफों का शोर होगा,

अब हर दिन, हर लम्हा, बस हमारा ही दौर होगा...!

一ーー😊一ー一

आप बेज़बान नहीं, मेरी ज़िंदगी की आवाज़ हैं,

आपके हर एक सपने पर, अब मुझे भी नाज़ है,

न कोई 'फरमान' होगा, न ऊँचे महलों की बात,

बराबरी के हक से, थामूँगा अब मैं आपका हाथ...!

一ー一😊一ー一

वो तूफान जो अंदर था, उसे बाहर न आने देंगे,

आदर और अनुराग की चादर, अब मिलकर हम बुनेंगे,

'मैं' और 'तुम' की ज़ंजीर से, 'हम' को बाहर लाते हैं,

चलो, उसी पुराने प्यार को, फिर से नया बनाते हैं...!

一ー一😊一ー一

पुराने ज़ख्म भरेंगे, नए वादों के मरहम से,

रिश्ता ये फौलाद बनेगा, अब प्रीत के संगम से,

उपेक्षा की वो रात गई, अब प्यार का उजाला है,

देखो 'आशा' आपके सब्र ने, फिर घर को संभाल डाला है...!

一ー一⛺️一ー一

👉 शुक्रिया 👈 

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● इस पूरी कविता में आपको कौन सी लाइन सबसे ज्यादा दिल को छू लेने वाली लगी ?

● 'मैं' और 'तुम' से ऊपर उठकर 'हम' बनने की बात आपको कैसी लगी ?

● फोन की आभासी दुनिया को छोड़कर अपनों को समय देने की बात कही गई है,इस पर आपके क्या विचार हैं ?

● क्या आपको लगता है कि किसी भी रिश्ते को 'घर' बनाने के लिए बराबरी का हक सबसे जरूरी है ?

● क्या बीते हुए कल की कड़वाहट को भूलकर एक नई शुरुआत करना ही सच्ची समझदारी है ?

● एक साथी के लिए इससे सुंदर सम्मान और क्या हो सकता है ?

● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-

'हम का नया सवेरा' हमें यह सिखाती है कि किसी भी रिश्ते की असली खूबसूरती एक-दूसरे का सम्मान करने और साथ मिलकर चलने में ही है। उपेक्षा की रात खत्म हो चुकी है और अब प्यार का उजाला रिश्तों के हर अंधेरे को मिटाने के लिए तैयार है। यह कविता इस बात का प्रतीक है कि यदि मन में सच्चा प्यार और एक-दूसरे के लिए जगह हो, तो हर कड़वाहट को मिठास में बदला जा सकता है। अंत में, जब हम अपनों का हाथ थामकर नई शुरुआत करते हैं, तो 'आशा' की गूँज घर के हर कोने में खुशहाली बनकर बस जाती है। उम्मीद है कि यह कविता आपके दिल को छुएगी और आपको अपने अपनों के साथ एक नई शुरुआत करने की प्रेरणा देगी।

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1 Comments

  1. 'मैं' और 'तुम' की ज़ंजीर से, 'हम' को बाहर लाते हैं,
    चलो, उसी पुराने प्यार को, फिर से नया बनाते हैं...!❤️


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