★ मेरे भोलेबाबा ★
दोस्तो, हिन्दू सनातन संस्कृति में देवों के देव महादेव को सृष्टि का सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारक दोनों रूपों में पूजा जाता है। भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि इस ब्रह्मांड की चेतना और हर प्राणी की आत्मा का हिस्सा हैं। 'भोलेनाथ' नाम से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि वे कितने सरल, दयालु और अपने भक्तों की एक पुकार पर सहज ही प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। उनके गले में सर्पों की माला, मस्तक पर चंद्रमा और जटाओं से बहती पवित्र गंगा उनकी महिमा और असीम शक्ति का प्रतीक है। जब जीवन में चारों तरफ निराशा छा जाती है और मनुष्य खुद को अकेला पाता है, तब केवल महादेव की शरण ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ मन को असीम शांति मिलती है। आइए, भगवान भोलेनाथ की इसी पावन महिमा और उनके स्वरूप का गुणगान करती हुई इस भावुक कविता से जुड़ते हैं...!
𝀈𝀈𝀈📿𝀈𝀈𝀈
कंठ में विष का प्याला है,
तन पर छाला है
माथे पर चंदा चमक रहा,
गले में सर्पों की माला है,
जटा से बहती निर्मल गंगा,
मन में शांति का वास है,
देवों के देव महादेव,
आप पर अटूट विश्वास है,
शून्य हो तुम, अनंत भी तुम,
प्रलय भी तुम, और वसंत भी तुम,
हाथ में त्रिशूल साजे,
डमरू की वो डम-डम है,
जब नाचें नटराज प्रेम में,
थिरकता ये ब्रह्मांड है,
भस्म लगाए बैठे बाबा मेरे,
जग से मोह को त्यागा है,
जिसके भीतर शिव जागा,
वो काल के डर से भागा है,
नीलकंठ है नाम आपका,
सारा विष पी जाते हो,
भक्तों के दुःख हरने को,
तुम दौड़े-दौड़े आते हो,
श्मशान के तुम वासी हो,
फिर भी जग के स्वामी हो,
कण-कण में तुम बसे हुए,
तुम ही अंतर्यामी हो,
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्,
हर-हर महादेव,जय शिव शम्भू...!
𝀈𝀈𝀈📿𝀈𝀈𝀈👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
Ahasas Dayri 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-
● महादेव का कौन सा स्वरूप आपके मन को सबसे ज्यादा शांति देता है ?
● क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब कोई रास्ता न दिखे, तो 'महाकाल' की कृपा ने राह दिखाई हो ।
● नीचे कमेंट में अपनी अहसास साझा करें ।
निष्कर्ष (Conclusion):-
इस प्रकार, भगवान शिव का यह पावन स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन चाहे कितना भी संघर्षपूर्ण क्यों न हो, महादेव का स्मरण और उन पर अटूट विश्वास हर मुश्किल को आसान कर देता है। वे श्मशान के वासी होने के बावजूद संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं और कण-कण में वास करते हैं। उनके नाम का स्मरण मात्र से भक्तों के सारे दुख हर लिए जाते हैं और मन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह कविता हमें भगवान भोलेनाथ के प्रति समर्पण और उनकी असीम कृपा का अहसास कराती है। अंततः, 'सत्यम शिवम सुन्दरम्' का यह संदेश हमारे जीवन को सच्चाई, पवित्रता और सुंदरता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हर हर महादेव, जय शिव शंभु!

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