★ लकीरों से परे ★
दोस्तों, आज की मेरी यह कविता 'लकीरों से परे' उस गहरे प्यार की कहानी है, जिसे दुनिया की बंदिशें या लकीरें भी अलग नहीं कर सकतीं। कभी-कभी प्यार का रिश्ता किस्मत से बड़ा होता है, और रूहों का जुड़ाव दुनिया की हर दीवार को तोड़ देता है।
इस कविता में मैंने उन अहसासों को लिखा है, जहाँ हम कहते हैं कि चाहे दुनिया लाख कोशिश कर ले, लेकिन जो दिल से जुड़े हैं, उन्हें अलग करना मुमकिन नहीं। यह कविता उन लोगों के लिए है जो मानते हैं कि सच्चा प्यार हर मुश्किल से ऊपर है।
अगर आप भी अपनी मोहब्बत में अटूट विश्वास रखते हैं, तो यह कविता आपको बहुत अच्छी लगेगी। इसे पूरा ज़रूर पढ़ें और अपनी भावनाओं को महसूस करें...!
𝀈𝀈𝀈💞𝀈𝀈𝀈
ज़माने की बंदिशें, ये दीवारें, ये पहरे,
ज़ख्म दिए हैं दुनिया ने बहुत गहरे,
हक़ीक़त की धूप में शायद तू मेरा न हो सके,
पर ख़्वाबों के शहर में, बस तेरे ही चेहरे...!
किस्मत के लिखे को बदलना, मेरे बस में नहीं,
मगर धड़कनों पर हुकूमत सिर्फ तुम्हारी रहेगी,
निकाल दे तुझे दिल से कोई, ये किसी के बस में नहीं...!
तू लकीरों में नहीं तो क्या, मेरी दुआओं में है,
तू पास नहीं तो क्या, मेरी वफाओ में है,
रिश्ता ये रूहानी है, इसे जिस्मों की ज़रूरत क्या,
तेरा नाम मेरी हर एक वफ़ा की सदाओं में है...!
ये दुनिया लाख कोशिश कर ले हमें जुदा करने की,
ये रस्म, ये रिवाज, ये साज़िशें हमें फ़ना करने की,
मगर रूह से रूह का जो अटूट धागा बंध गया है,
मौत की भी मजाल नहीं, उस डोर को जुदा करने की...!
𝀈𝀈𝀈💞𝀈𝀈𝀈👉 शुक्रिया 👈
आपकी अपनी 🌹
अहसास डायरी 📕
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कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-
इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में पाठकों के लिए कुछ सवाल हैं:-
● क्या आपको भी लगता है कि रूहानी रिश्ता जिस्मानी मौजूदगी से बड़ा होता है ?
● "किस्मत के लिखे" और "दिल की धड़कन" में से आप किसे ज्यादा ताकतवर मानते हैं ?
● क्या हकीकत से दूर ख्वाबों में किसी को अपना मान लेना सुकून देता है ?
● क्या समाज की दीवारें कभी दो रूहों के मिलन को रोक सकती हैं ?
● "तू लकीरों में नहीं तो क्या, दुआओं में है"—इस लाइन पर आपकी क्या राय है ?
● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।
लेखिका की कलम से(निष्कर्ष):-
"लकीरों से परे" कविता हमें यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम केवल दिखावे या भौतिक बंधनों का मोहताज नहीं होता। दुनिया की बनाई हुई लकीरें, रस्में और दीवारें चाहे कितनी भी मज़बूत क्यों न हों, वे उन दिलों को कभी अलग नहीं कर सकतीं जो रूह के स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह कविता इस विश्वास को पुख्ता करती है कि किस्मत और लकीरों से कहीं बढ़कर हमारे जज्बात और हमारी दुआएं होती हैं। अंत में, यह प्रेम की उस जीत की गाथा है, जहाँ मौत या कोई भी बाहरी ताकत रूहानी रिश्ते के धागे को तोड़ नहीं सकती। प्यार का असली स्वरूप भौतिक सीमाओं से परे, रूह के मिलन में ही निहित है।
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1 Comments
Lovely
ReplyDeleteशब्दों में ढालिए अपने खयालात,
हम सुनने को बेताब हैं। ✍️📖
दिल से दिल तक पहुँचे जो अहसास,
वही तो सबसे खास हैं। 🤗💖
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अपना आशीर्वाद दीजिए 🙌