__________________________ अनमोल यारी

अनमोल यारी

★ अनमोल यारी ★

(हँसी, यादें और अंतहीन बातें)

दोस्तों, बचपन और स्कूल के वो सुनहरे दिन भला किसे नहीं याद आते? जब जिंदगी बेफिक्र थी, जिम्मेदारियों का बोझ नहीं था और चेहरे पर हमेशा एक सच्ची मुस्कान हुआ करती थी। स्कूल की घंटी बजते ही मैदान में दोस्तों के साथ दौड़ना, टिफिन शेयर करना और हर छोटी बात पर बेइंतहा हंसना—ये वो अनमोल पल हैं, जो दिल के सबसे करीब होते हैं। जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ता है, हम बड़े हो जाते हैं, और जीवन की भागदौड़ हमें अलग-अलग रास्तों पर ले जाती है। शहर बदलते हैं, रास्ते बदलते हैं, और कभी-कभी बचपन के पक्के दोस्त भी दूर हो जाते हैं।

यह भावुक हिंदी कविता इन्हीं खूबसूरत यादों, सच्ची दोस्ती और वक्त के साथ आई दूरियों को बेहद संवेदनशीलता के साथ बयां करती है। कविता में उन तीनों सखियों—आशा, श्रद्धा और संध्या—की गहरी दोस्ती का जिक्र है, जो एक दौर में एक-दूसरे की जान हुआ करती थीं। समय की आंधी में भले ही सब अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हो गए हों, लेकिन दिल के कोने में आज भी उन पुराने दिनों की खुशबू जिंदा है।

यह कविता सिर्फ शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह रूह के उस रिश्ते को समर्पित है जिसे दोस्ती कहा जाता है। यह कविता हमें अहसास कराती है कि चाहे रास्ते कितने भी जुदा क्यों न हो जाएं, और दूरियां चाहे कितनी भी बढ़ जाएं, लेकिन एक सच्चे दोस्त की यादें और फोन पर होने वाली लंबी बातें हमेशा हमारे दिल को सुकून देती हैं। यह उन पलों को फिर से जीने का एक खूबसूरत जरिया है, जो हमें हमारी जड़ों और उन अनमोल रिश्तों से जोड़े रखता है, जो भगवान का सबसे हसीन तोहफा होते हैं...!

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बचपन की महक और पुरानी यादें

याद आते हैं वो स्कूल के हँसते मुस्कराते दिन,

टिफ़िन की वो छोटी सी नोक झोंक और बेफिक्री से दिन,

जहाँ टिफिन छुपा कर हम मिलकर खाया करते थे,

बातों ही बातों में अपने सारे दिन बिताते थे।

आज भी दिल के किसी कोने में महकती है वो याद,

जहाँ हर डाँट और सजा में भी था एक अलग ही स्वाभिमान...!

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तीन सखियों की वो सुंदर टोली

स्कूल के वो दिन सुहाने, कहाँ खो गए वो पुराने अफ़्साने,

जहाँ दिल खोल के हँसा करते थे, हर गम को हँस के सहा करते थे,

आशा, श्रद्धा और संध्या, नाम था हमारा प्यारा,

जैसे रंगों से भरी हो कोई होली, वो सुंदर टोली थी हमारी,

आज भागती इस दुनिया की भीड़ में, जाने कहाँ खो गए हम इस भीड़ में,

तुम्हारे बिना सूना सा लगता है जहाँ, याद आते हैं वो रास्ते और वो कारवाँ...!

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वक़्त के बदलाव और दूरियाँ

वक़्त बदला, उम्र बढ़ी, और दूरियाँ भी बहुत आईं,

शहर बदले, रास्ते बदले, और बदल गईं तन्हाइयाँ,

पर दिल के तार आज भी वहीं जुड़े हैं मेरी प्यारी सखी,

चाहे कितनी भी आ जाए बीच में दूरियों की दीवारें,

एक फोन की घंटी और तेरी वो पुरानी हँसी गूँज उठती है,

जैसे कल की ही बात हो, और मेरी हर थकान मिट जाती है...!

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रूह का यह हसीन रिश्ता

यह सिर्फ एक रिश्ता नहीं, रूह का मुकाम है,

दोस्ती तो भगवान का दिया, सबसे हसीन इनाम है,

साँसें जब तक चलेंगी, यह याराना ज़िंदा रहेगा,

हर मुश्किल दौर में मेरा हाथ, तेरे हाथ में रहेगा,

शुक्रिया मेरी प्यारी सखी, मेरी ज़िंदगी में आने के लिए,

हर मोड़ पर मुझे खुलकर, मुस्कुराना सिखाने के लिए...!

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दुआ और सदाबहार बंधन

जब भी उन पलों को याद करती हूँ मैं,

सौ बार खुद को आबाद करती हूँ मैं,

चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आती है,

तेरी-मेरी ये सच्ची दोस्ती बहुत याद आती है,

सदा महकती रहे हमारी दोस्ती की यह बगिया,

तेरे बिना तो सच में अधूरी सी लगती है यह दुनिया,

दुआ है यही रब से मेरे यारों,

सलामत रहे हमेशा ये बंधन हमारा और तुम्हारा...!

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👉 शुक्रिया 👈 

आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕

कुछ अनकहे सवाल (आपका नजरिया):-

इस कविता को लिखने के बाद, मेरे मन में कुछ सवाल हैं:-

● क्या आपको भी अपने स्कूल के दिन और पुराने दोस्त बहुत याद आते हैं ?

● क्या समय और दूरियों के बढ़ने से आपके बचपन के दोस्त भी आपसे बिछड़ गए हैं ?

● आपकी जिंदगी में ऐसा कौन सा खास दोस्त है, जिसके बिना आपकी दुनिया अधूरी लगती है ?

● क्या आज भी आपकी अपनी पुराने दोस्तों से फोन पर लंबी बातें होती हैं ?

● स्कूल के समय की आपकी सबसे पसंदीदा और यादगार शरारत कौन सी थी ?

● आपके अनुसार, क्या वक्त बदलने के बाद भी दोस्ती का रिश्ता पहले जैसा मजबूत रह सकता है ?

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निष्कर्ष:-

बचपन और स्कूल के वो दिन हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत और अनमोल हिस्सा होते हैं, जिन्हें चाहकर भी कभी भुलाया नहीं जा सकता। समय की रफ्तार और जिंदगी की भागदौड़ चाहे हमें अपनों से कितनी भी दूर क्यों न ले जाए, लेकिन सच्ची दोस्ती की खुशबू हमेशा हमारे दिलों में महकती रहती है। यह कविता हमें यह सिखाती है कि भौगोलिक दूरियां या वक्त का बदलाव कभी भी रूह से जुड़े रिश्तों को कम नहीं कर सकता।

आशा, श्रद्धा और संध्या जैसी गहरी मित्रता यह साबित करती है कि दोस्त भगवान का दिया हुआ सबसे हसीन तोहफा होते हैं, जो हर मुश्किल दौर में हमारा संबल बनते हैं। भले ही आज सब अपनी-अपनी व्यस्त जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, पर पुरानी यादें, फोन पर होने वाली बातें और एक-दूसरे के लिए दिल में बची दुआएं इस रिश्ते को हमेशा अमर रखती हैं।

अंत में, यह कविता सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि हर उस शख्स के लिए एक सुंदर अहसास है जो अपने पुराने दोस्तों और सुनहरे दिनों को शिद्दत से याद करता है। यह हमें याद दिलाती है कि जीवन के किसी भी मोड़ पर सच्चे दोस्तों का साथ और उनकी दुआएं ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी होती हैं।

#SchoolMemories #TrueFriendship

#SchoolFriends #Ashu #Shardhha 

#Sandhya #HappyFriendshipDay

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