इश्क रूहानी

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  ★ इश्क रूहानी ★ इश्क लफ्ज़ छोटा है, पर खूबसूरत है, ये रूह की इबादत, खुदा सा यकीन है, इश्क हीर-रांझे की अमर कहानी में है, इश्क शिव-सती की पावन निशानी में है...! राधा-कृष्ण के त्याग का यह नाम है, मीरा की अटूट दीवानगी का जाम है, इश्क बहते हुए निर्मल पानी की धार है, जिसे देख न पाए, ऐसा यह संसार है...! इश्क बंद आँखों में सजता एक ख्वाब है, हर दर्द-परेशानी का मुकम्मल जवाब है, इश्क साथ हो तो गम में भी मुस्कान है, राहों का साथी, मंज़िल का अरमान है...! इश्क वो इंतज़ार है जो सबसे होता नहीं, वो भरोसा है जो कभी टूटता नहीं, इश्क जिस्म की चाहत से अनजान है, एक दूजे के लिए दिल में बस सम्मान है...! इसके होने से हर लम्हा सुकून है, खामोशी में छुपा ये गहरा जुनून है, इश्क जिससे हो जाए, वही भगवान है, रूह से जुड़ जाए, तो यही पहचान है, इश्क की अपनी ही एक जुबानी है, समझ सको तो इश्क रूहानी है...! 🌸 शुक्रिया 🌸  आपकी अपनी 🌹   Ahasas Dayri 📕 ● आपके हिसाब से रूहानी इश्क का असली मतलब क्या है ? ● कविता की कौन सी लाइन आपको सबसे ज्यादा पसंद आई ? ● क्या आपको भी लगता है कि सच्चा इश्क सिर्फ सम्मान पर टिका...

तू ही मेरी इबादत

 ★ तू ही मेरी इबादत ★

मैं ढूँढूँ दुनिया में खुद को,

जैसे कोई पर्वत खड़ा,

तू मिल जाए तो लगता है,

मेरा सफर बस अब है बढ़ा,

वो पत्थर जैसी सीने की धड़कन,

तुझसे ही मचलती है,

तेरे आँचल की छाँव मिले तो,

रूह मेरी संभलती है,

तू है सुकून मेरा,

तू ही है मेरा हर रास्ता,

तू शक्ति मेरी,

तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...!

सजे हों छप्पन भोग भले,

महकती हो ये थालियाँ,

तेरे बिना फीकी लगती हैं,

ये सब रंग-बिरंगी खुशियाँ,

जैसे कान्हा को तुलसी भाए,

बिन उसके भोग अधूरा है,

तेरा साथ न हो जो साथ मेरे,

तो जग ये सब कोरा है,

तू सावन की पहली बूंद,

मैं प्यासी जमीं का रास्ता,

तू शक्ति मेरी,

तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...!

दुनिया की तलवारें लेकर,

मैंने तो जग को जीत लिया,

पर तुझसे जो एक लफ्ज़ सुना,

मैंने खुद को जीत लिया,

बड़े-बड़े सम्राट झुके,

जो तेरी आँखों के आगे,

जीत का असली गहना तो,

बस तेरी सादगी में जागे,

तू ही मेरी जीत की मंजिल,

तू ही मेरा इकलौता राब्ता,

तू शक्ति मेरी,

तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...!

एक तू है, जो कर्म की राह में,

मेरी ढाल बन जाती है,

एक मैं हूँ, जो श्रद्धा में तेरी,

खुद को भूल जाता हूँ,

ये सृष्टि की जो डोरी है,

तूने ही तो ये बुनी है,

तू न हो तो मौन धरा,

तू हो तो भोर की सुबह है,

तू ही मेरी इबादत है,

तू ही मेरी प्रार्थना का वास्ता,

तू शक्ति मेरी,

तू ही मेरी श्रद्धा का वास्ता...!



🌸 शुक्रिया 🌸 



आपकी अपनी 🌹 

Ahasas Dayri 📕



● कवि ने अपनी 'शक्ति' किसे माना है और उनके होने से कवि के जीवन में क्या बदलाव आता है ?


● 'छप्पन भोग' और 'तुलसी' के उदाहरण से कवि क्या कहना चाहता है ?


● 'दुनिया को जीतना' और 'खुद को जीतना' - इन दोनों में कवि के लिए ज्यादा जरूरी क्या है और क्यों ?


● कठिन समय में 'ढाल' बनने से कवि का क्या अर्थ है ?


● यह कविता पढ़ने के बाद आपको कैसा महसूस हुआ ? क्या आपको लगा कि यह किसी खास के प्रति समर्पित है ?


● नीचे कमेंट्स में अपनी अहसास साझा करें।

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